
US Iran War: पश्चिम एशिया खासकर फारस की खाड़ी व होर्मुज स्ट्रेट के पास तनाव काफी बढ़ गया है। शनिवार को अमेरीकी नौसेना की समुद्री नाकेबंदी को तोड़ने के लिए ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों से एयरक्राफ्ट कैरियर और एक विध्वंसक शिप पर हमला कर दिया था। जवाब में अमेरीका ने तीन ईरान के तेल टैंकरों पर हमले किए और इसका वीडियो भी जारी किया। इसके बाद ईरानी रिवोल्यूश्नरी गार्ड्स ने भी कार्रवाई की और छह जहाजों व एक अमरीकी नौसैनिक ड्रोन बोट को निशाना बनाया। आइआरजीसी ने साफ कहा है कि अमरीकी नाकेबंदी आर्थिक रूप से उस पर ही भारी पड़ सकती है। आइआरजीसी के प्रवक्ता ने कहा कि अगर अमेरीका ईरान को एक डॉलर का भी आर्थिक नुकसान पहुंचाना चाहता है, तो उसे खुद कई डॉलर की लागत और नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ईरानी संसद के स्पीकर बाघेर गलिबाफ ने तेजी से बदले हालातों के बीच चेतावनी दी है कि अमरीकी हमलों का जवाब अब बराबर का नहीं होगा। देश पर होने वाले हमलों का जवाब ज्यादा तेज, जबरदस्त और ज्यादा दर्दनाक होगा। हमलावर ठिकानों के विरुद्ध हमारे हाल ही में हुए ऑपरेशन तो बस शुरुआत थे। उन्हें समझ लेना चाहिए कि खेल के नियम बदल चुके हैं। ईरान अमेरीकी आर्थिक अभियान का सामना वैसे ही करेगा, जैसे उसने अमेरीका को सैन्य व कूटनीतिक तौर पर हराया है।
अमेरीकी प्रतिबंधों के जवाब में ईरान ने इकोनॉमिक वॉर टास्क फोर्स का गठन किया है। ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार यह टास्क फोर्स मौजूदा हालात में आर्थिक समस्याओं को सुलझाने का काम करेगी।
पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध के बाद हालात तेजी से बदले हैं। अमेरीका अब ईरान को रोकने से लेकर गाजा विवाद सुलझाने और इजरायल- सऊदी अरब के संबंधों को सामान्य करने की योजना पर काम कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरीका युद्ध के बाद अपनी पश्चिम एशिया नीति को बदल सकता है। इसके तहत ईरान के विरुद्ध क्षेत्रीय मोर्चे को मजबूत करने का अमेरीका प्रयास करेगा। वहीं, इसके साथ ही ट्रंप अपनी गाजा योजना को भी आगे बढ़ाएंगे।