
गाजा शहर (फोटो- X@angel_nowar)
Gaza Displacement Plan: इजराइली मंत्रियों की गाजा पट्टी से लगभग 23 लाख फ़िलिस्तीनी नागरिकों को चरणबद्ध तरीके से विस्थापित करने की योजना पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया है। कतर, सऊदी अरब, मिस्र, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इंडोनेशिया, पाकिस्तान और तुर्की ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस योजना की निंदा की है। रविवार को जारी संयुक्त बयान में इन देशों के विदेश मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि यह कदम न केवल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन है, बल्कि गाजा में शांति स्थापित करने के वैश्विक प्रयासों को पूरी तरह से पटरी से उतारने का सीधा खतरा भी पैदा करता है।
आठ देशों के विदेश मंत्रियों ने इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर और रक्षा मंत्री काट्ज के बयानों की कड़ी निंदा की, जिनमें गाजा से फ़िलिस्तीनियों को हटाने की योजना की बात सामने आई थी। बयान में कहा गया है कि इस तरह की घोषणाएं और प्रस्ताव फ़िलिस्तीनी लोगों के अधिकारों के लिए सीधा खतरा हैं। इन देशों ने कहा कि गाजा और वेस्ट बैंक सहित फिलिस्तीनी क्षेत्र की एकता को बनाए रखना जरूरी है।
साझा की गई जानकारी के अनुसार, इजराइल के रक्षा मंत्री काट्ज ने गाजा से लोगों को जबरन हटाने को एकमात्र समाधान बताया था और कहा था कि सरकार विस्थापन के ठिकाने के संबंध में अमेरिकी मंजूरी का इंतजार कर रही है।
इसके बाद, राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने विस्थापन के लिए एक विस्तृत रूपरेखा साझा की थी। बेन-गवीर के अनुसार, योजना के तहत पहले साल में 2,50,000 फ़िलिस्तीनियों को गाजा से बाहर भेजा जाएगा। इसके बाद अगले छह वर्षों में बाकी बचे लगभग 20 लाख लोगों को विस्थापित किया जाएगा।
बेन-गवीर ने बताया कि इस योजना को लागू करने के लिए, इजराइल में एक समर्पित मंत्रालय स्थापित करने और विस्थापित फ़िलिस्तीनियों के पुनर्वास के लिए अन्य देशों के साथ समझौते करने के प्रस्ताव दिए गए हैं।
इजराइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने गाजा से फ़िलिस्तीनियों को जबरदस्ती हटाने की किसी भी योजना से इनकार किया है। उन्होंने कहा, "मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि इजराइलियों की ऐसी कोई योजना नहीं है कि लोगों को उनकी मर्जी के खिलाफ गाजा से हटाया जाए। कोई भी लोगों को जबरदस्ती हटाने की बात नहीं कर रहा है। मैं ऐसे किसी व्यक्ति को नहीं जानता जो ऐसी बात का समर्थन करता हो।"
आठ देशों के विदेश मंत्रियों ने चेतावनी दी कि ऐसे भड़काऊ बयानों को आधिकारिक नीति में बदलने से पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र की स्थिरता खतरे में पड़ जाएगी। संयुक्त बयान में कहा गया कि यह कदम गाजा में संघर्ष को खत्म करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के लिए एक चुनौती है, खासकर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित शांति योजना के लिए, जिसमें जबरन विस्थापन को स्पष्ट रूप से खारिज किया गया था। साझा बयान में कहा गया है कि गाजा पट्टी कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र का अभिन्न अंग है और जबरन विस्थापन की किसी भी कोशिश को किसी भी बहाने से स्वीकार नहीं किया जाएगा।
संयुक्त बयान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई कि वे अपनी जिम्मेदारी निभाएं और कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र में किसी भी तरह की नई डेमोग्राफिक या ज्योग्राफिकल स्थिति थोपने के प्रयासों को तुरंत रोकें। आठों देशों के संयुक्त बयान में यह भी कहा गया है कि इस क्षेत्र में स्थायी और न्यायपूर्ण शांति का एकमात्र रास्ता 4 जून 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी राज्य की स्थापना और 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' को लागू करना है।
Updated on:
06 Sept 2026 06:14 pm
Published on:
06 Sept 2026 06:14 pm
