
Iran war crimes allegations: संयुक्त राष्ट्र में ईरान के उप राजदूत गुलामहोसैन दर्जी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के मंच से अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इन दोनों देशों पर ईरानी नागरिकों के खिलाफ युद्ध अपराध करने का आरोप लगाते हुए कहा कि हालिया हमलों में 254 मासूम बच्चों की जान चली गई है। सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए ईरानी राजनयिक ने कहा कि इस पूरे संघर्ष में ईरान कोई आक्रामक देश नहीं है, बल्कि वह इस युद्ध का सबसे बड़ा शिकार और पीड़ित पक्ष है।
गुलामहोसैन दर्जी ने सुरक्षा परिषद को बताया कि अमेरिका और इजरायल के सशस्त्र बलों ने जानबूझकर नागरिकों के रिहायशी इलाकों, स्कूलों, अस्पतालों, हवाई अड्डों, ऊर्जा सुविधाओं और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है। उन्होंने कहा कि ये हमले केवल सैन्य लक्ष्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका स्पष्ट उद्देश्य आम नागरिकों में दहशत फैलाना और उन्हें नुकसान पहुंचाना है, जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और जिनेवा कन्वेंशन का खुला उल्लंघन है।
ईरानी उप राजदूत ने वाशिंगटन के राजनीतिक रुख पर हमला करते हुए कहा कि अमेरिका पहले आक्रामकता दिखाता है, बड़े पैमाने पर निर्दोष नागरिकों की जान लेता है और फिर सुरक्षा परिषद के मंच का दुरुपयोग कर खुद को पीड़ित के रूप में पेश करने की कोशिश करता है। उन्होंने कहा कि किसी भी महाशक्ति को इस तरह का पाखंड करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
अपने दावों को साबित करने के लिए ईरानी राजनयिक ने सुरक्षा परिषद के सामने उन बच्चों की तस्वीरें भी दिखाईं, जिनके बारे में उन्होंने कहा कि वे अमेरिकी और इजरायली हमलों में मारे गए हैं। इनमें वे बच्चे भी शामिल थे जो कथित तौर पर एक स्कूल पर हुए हमले का शिकार हुए थे।
गुलामहोसैन दर्जी ने बताया कि ये तस्वीरें उन 254 बच्चों में से केवल कुछ की हैं, जिनकी इन हमलों में जान गई है। वैश्विक समुदाय से अपनी अंतिम अपील में उन्होंने आग्रह किया कि जिन लोगों ने इन जघन्य अपराधों का आदेश दिया, उन्हें अंजाम दिया या उनमें मदद की, उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए और किसी भी दोषी को जवाबदेही से बचने नहीं दिया जाना चाहिए।