
डोनाल्ड ट्रंप (File Photo/ANI)
अमेरिका के संघीय चुनाव आयोग को हैकरों ने निशाना बनाया है। इसके चलते 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से कुछ दिन पहले इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग प्रणाली ठप हो गई है। रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यह समस्या ऐसे समय में आई है, जबर राजनीतिक पार्टियां और सुपर PAC चुनाव अभियान के अंतिम दिनों में रिकॉर्ड स्तर पर खर्च कर रही है। खास बात यह है कि यह चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बेहद अहम है, क्योंकि इस चुनाव से तय होगा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस में अपना बहुमत बरकरार रख पाती है या नहीं।
वहीं, एक बयान में FEC (संघीय चुनाव आयोग) ने कहा कि उसकी इलेक्ट्रॉनिक पाइलिंग प्रणाली ऑफलाइन है। उसके आईटी कर्मचारी सेवा बहाल करने में जुटे हुए हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक FEC के एक इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग अधिकारी ने सोमवार रात अभियान अनुपालन से जुड़ी कंपनियों को ईमेल भेजा। उसमें कहा गया था कि हैकर्स लगातार FEC की प्रणालियों में सेंध लगाने की कोशिश में जुटे हैं। इसलिए हमें अपनी वेब आधारित सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ रही है।
वहीं, इस आउटेज के कारण राजनीतिक संगठन अनिवार्य 24 घंटे व 48 घंटे के चुनावी खर्च की रिपोर्ट दाखिल नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि, उपयोगकर्ता FEC की वेबसाइट पर पहले दाखिल की जा चुकी रिपोर्टें अब भी खोज सकते हैं। संघीय चुनाव आयोग ने कहा कि समस्या की पहचान कर ली गई है। उसे ठीक करने का काम जारी है।
गौरतलब बात यह है कि FEC उम्मीदवारों और राजनीतिक समितियों के चुनावी खर्च पर नजर रखता है, लेकिन अमेरिका में चुनाव कराने का काम उसके पास नहीं है। इसलिए इन मुश्किलों से मतदाताओं के वोट डालने पर असर पड़ने की आशंका नहीं है। खास बात यह है कि यह साइबर घटना ऐसे समय हुई है, जब ट्रंप 3 नवंबर के चुनावों से पहले चुनावी ईमानदारी पर जोर देते रहे हैं। इन चुनावों से कांग्रेस के दोनों सदनों का नियंत्रण तय होगा और ट्रंप के शेष कार्यकाल के विधायी एजेंडे पर भी असर पड़ेगा।
ट्रंप ने कहा है कि अगर चुनाव ईमानदारी से हुए तो वे नतीजों का सम्मान करेंगे, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर वे वीटो शक्ति का इस्तेमाल कर सकते हैं। पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि हम कोई रास्ता निकाल लेंगे। मेरे पास मजबूत वीटो है। मुझे उम्मीद है कि ऐसा नहीं होगा, लेकिन अगर हुआ, तो पहले भी ऐसा हो चुका है। मैं करूंगा, अगर चुनाव ईमानदार हुए।
इससे पहले ट्रंप ने पिछले चुनावों या आगामी 2026 मध्यावधि चुनावों से जुड़े मतदाता धोखाधड़ी में शामिल लोगों की गिरफ्तारी और दोषसिद्धि में मददगार जानकारी देने पर 10 लाख डॉलर के इनाम की घोषणा की थी। ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने लिखा था कि पिछले चुनावों या आगामी 2026 के मध्यावधि चुनाव में मतदाता धोखाधड़ी की सूचना देने वाले किसी भी व्यक्ति को, धोखाधड़ी करने वालों की गिरफ्तारी और दोषसिद्धि होने पर, 10,00,000 डॉलर दिए जाएंगे।
3 नवंबर के चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर मुकाबला होगा, साथ ही सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों पर भी चुनाव होगा। नतीजों से वॉशिंगटन में राजनीतिक शक्ति का संतुलन तय होगा और यह भी कि प्रशासन अपनी नीतिगत प्राथमिकताओं को किस हद तक आगे बढ़ा सकता है।
रविवार को प्रकाशित सीबीएस न्यूज के एक सर्वे के अनुसार, डेमोक्रेट्स के प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव) में 229 सीटें जीतने का अनुमान है, जिससे उन्हें बहुमत मिल सकता है, हालांकि रिपब्लिकन के लिए नियंत्रण बनाए रखने का एक छोटा रास्ता अब भी बचा है। वहीं, एक सर्वे में अमेरिकियों ने महंगाई और व्यापक आर्थिक चिंताओं को प्रमुख मुद्दा बताया है।
सर्वे में आगे यह भी सामने आया कि ज्यादा डेमोक्रेटिक मतदाताओं ने कहा कि वे वोट डालना तय कर चुके हैं या पहले ही मतदान कर चुके हैं, जबकि कम प्रतिबद्ध मतदाताओं का झुकाव रिपब्लिकन की ओर देखा गया। ऐसे में मतदान प्रतिशत निर्णायक कारक बन सकता है।
Updated on:
28 Oct 2026, 9:10 AM IST
Published on:
28 Oct 2026, 8:38 AM IST
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