
दक्षिण कोरिया की पूर्व ‘फर्स्ट लेडी’किम केओन ही, (Photo- IANS)
Kim Keon Hee Detention: दक्षिण कोरिया के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद पूर्व 'फर्स्ट लेडी' किम केओन ही के खिलाफ गिरफ्तारी का एक नया वारंट जारी किया। इसके तहत उन्हें दो और महीनों तक हिरासत में रखा जाएगा। अदालत ने उनके भागने और सबूत नष्ट करने के जोखिम का हवाला देते हुए यह फैसला लिया है।
यह फैसला तब आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने किम (जो दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यूं सुक येओल की पत्नी हैं) के मामले में सुनवाई की। इस सुनवाई का मकसद यह तय करना था कि उनकी हिरासत की अवधि, जो शनिवार को खत्म होने वाली थी, उसे आगे बढ़ाया जाए या नहीं।
योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई के कुछ घंटों बाद ही शीर्ष अदालत ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने उनके भागने और सबूतों को नष्ट करने की आशंका जताई है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में किम के खिलाफ दो अलग-अलग मामलों में मुकदमा चल रहा है - पहला भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है और दूसरा रिश्वतखोरी से संबंधित है। विशेष वकील मिन जोंग-की की टीम ने दूसरे मामले के आधार पर नया वारंट जारी करने का अनुरोध किया था, क्योंकि भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा उनका मौजूदा वारंट अंतिम फैसला आने से पहले ही खत्म हो जाएगा।
किम ने सियोल नाम्बू डिटेंशन सेंटर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में हिस्सा लिया। वह अगस्त 2025 से ही वहां हिरासत में हैं। खबरों के मुताबिक, उन्होंने मध्यस्थता के बदले रिश्वत लेने के आरोपों को खारिज कर दिया और वीडियो कॉल के दौरान खुद को बेकसूर बताया। उनके वकीलों ने किम की सेहत को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि राजनीतिक हमलों की वजह से उन पर मानसिक दबाव है और उन्हें लंबे समय से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दवाएं लेनी पड़ रही हैं।
आपराधिक प्रक्रिया अधिनियम (Criminal Procedure Act) के तहत, किसी आरोपी को दो महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है। सिद्धांत रूप में, हिरासत की अधिकतम अवधि छह महीने तक हो सकती है, जिसे दो-दो महीने के लिए दो बार बढ़ाया जा सकता है।
यह सुनवाई ऐसे समय में हुई है जब सुप्रीम कोर्ट, अपीलीय अदालतों द्वारा किम को सुनाई गई सजाओं की समीक्षा कर रहा है। इनमें भ्रष्टाचार के मामले में चार साल की जेल और रिश्वतखोरी के मामले में पांच साल की जेल की सजा शामिल है। पहले मामले की कार्यवाही तब लंबी खिंच गई, जब जुलाई में इसे सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण पीठ (full bench) के पास भेज दिया गया था।
यह मुकदमा मुख्य रूप से इन आरोपों पर केंद्रित है कि किम स्टॉक की कीमतों में हेरफेर करने की योजना में शामिल थीं, उन्होंने 'यूनिफिकेशन चर्च' से महंगे उपहार लिए थे, और खुद को 'पावर ब्रोकर' बताने वाले एक व्यक्ति से ओपिनियन पोल के नतीजे मुफ्त में हासिल किए थे। दूसरा मुकदमा उन आरोपों से जुड़ा है कि किम ने नौकरी दिलाने और व्यावसायिक लाभ पहुंचाने के बदले में कई लोगों से महंगे उपहार लिए थे।
Updated on:
27 Oct 2026, 8:33 PM IST
Published on:
27 Oct 2026, 8:18 PM IST
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