27 अक्टूबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सऊदी अरब की प्रमुख तेल रिफाइनरी पर हूती विद्रोहियों ने किया हमला

Houthis-Saudi Arabia Conflict: हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर आज फिर हमले करते हुए देश की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भारत

•

image

Tanay Mishra

•

Updated: 27 Oct 2026, 8:14 PM IST

Houthis missile strike

हूती विद्रोहियों ने दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें (File Photo)

यमन (Yemen) के हूती विद्रोहियों (Houthis) की देश की सरकारी सेना के साथ ही सऊदी अरब (Saudi Arabia) से भी जंग चल रही है। हूती विद्रोही और सऊदी अरब पिछले करीब दो महीने में एक-दूसरे पर कई हमले कर चुके हैं और अभी भी हमलों का सिलसिला थमा नहीं है। आज एक बार फिर हूतियों ने सऊदी अरब पर हमला किया है और देश की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया है।

रस तनुरा तेल रिफाइनरी पर किया मिसाइल अटैक

हूतियों ने आज सऊदी अरब की प्रमुख तेल रिफाइनरी रस तनुरा (Ras Tanura) पर हमला किया। जानकारी के अनुसार हूती विद्रोहियों ने इस हमले के लिए बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया। इसके अलावा हूतियों ने सऊदी अरब के सैन्य विमानों पर भी हमला किया और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट (Bab el-Mandeb Strait) जो लाल सागर (Red Sea) में जहाजों के आवागमन का एक अहम मार्ग है, के पास सऊदी समर्थित सेना की आगे बढ़ती टुकड़ियों पर भी हमला करते हुए उन्हें पीछे खदेड़ दिया।

सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी है रस तनुरा

रस तनुरा तेल रिफाइनरी सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी है। इसकी कच्चा तेल शोधन क्षमता 550,000 बैरल प्रतिदिन है। यह रिफाइनरी हर दिन बड़ी मात्रा में रिफाइंड उत्पाद जैसे पेट्रोल, डीज़ल और जेट फ्यूल तैयार करती है, जो सऊदी अरब की लगभग 40% घरेलू फ्यूल की ज़रूरतों को पूरा करते हैं। यह रिफाइनरी सीधे रस तनुरा बंदरगाह से जुड़ी है। यह बंदरगाह दुनिया के सबसे बड़े और अहम अपतटीय कच्चे तेल और पेट्रोलियम निर्यात टर्मिनलों में से एक है, जहाँ से हर साल हज़ारों मालवाहक जहाज और तेल टैंकर आते-जाते हैं।

हूती विद्रोही और सऊदी अरब क्यों हैं एक-दूसरे के खिलाफ?

यमन में 2014 के आखिर में संघर्ष तब शुरू हुआ जब हूतियों ने सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने मार्च 2015 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में दखल दिया। तभी से दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है और दोनों ही एक-दूसरे के खिलाफ हैं। हूतियों को ईरान (Iran) का समर्थन प्राप्त है तो वहीँ सऊदी अरब की तरफ से यमन की सरकारी सेना को समर्थन प्राप्त है।