28 अक्टूबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Israel Election 2026 Exit Polls: इजरायल चुनाव में बड़ा उलटफेर! नेतन्याहू और विपक्ष 51-51 सीटों पर बराबर, सरकार बनाने की चुनौती

Benjamin Netanyahu News: इजरायल की 120 सदस्यीय संसद में बहुमत का आंकड़ा 61 सीटें है, लेकिन दोनों प्रमुख खेमे फिलहाल 51-51 पर अटके हैं। ऐसे में चुनावी जीत से ज्यादा अहम उन सहयोगियों की भूमिका हो गई है, जिनके समर्थन के बिना सरकार बनाना मुश्किल होगा।
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भारत

•

image

Manoj Vashisth

•

Updated: 28 Oct 2026, 6:34 AM IST

Israel Election 2026

Israel Election 2026:इजरायल में त्रिशंकु मुकाबला: नेतन्याहू और विपक्ष 51-51 सीटों पर बराबरी पर, बहुमत से 10 कदम दूर (फोटो सोर्स: ANI)

Israel Election 2026: इजरायल की सियासत में चुनावी नतीजों के शुरुआती संकेतों ने मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गठबंधन और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाला विपक्ष बहुमत से दूर नजर आ रहे हैं। एग्जिट पोल के ये आंकड़े देश में नई सरकार के गठन को लेकर अनिश्चितता बढ़ा रहे हैं। अब सबकी निगाहें अंतिम नतीजों और उन छोटे दलों पर टिकी हैं, जो सत्ता का पूरा समीकरण बदल सकते हैं।

Israel Election 2026: 61 सीटों का जादुई आंकड़ा, दोनों खेमों की राह मुश्किल

इजरायल के चुनावी मुकाबले में फिलहाल किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बढ़त मिलती नहीं दिख रही है। देश के सार्वजनिक प्रसारक कान (Kan) के ताजा एग्जिट पोल के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गठबंधन और विपक्षी खेमे को 51-51 सीटें मिलने का अनुमान है। इससे पहले चैनल 13 के अपडेटेड सर्वे में भी दोनों पक्षों के बीच लगभग यही स्थिति सामने आई थी।

इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है, जिसमें कुल 120 सदस्य होते हैं। सरकार बनाने के लिए किसी दल या गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन चाहिए। मौजूदा अनुमानों में दोनों खेमे इस जरूरी संख्या से 10 सीट पीछे हैं। यदि अंतिम नतीजे भी इसी तस्वीर की पुष्टि करते हैं, तो सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दलों को नए सहयोगी तलाशने पड़ सकते हैं।

Israel Election Results: लिकुड सबसे बड़ी पार्टी, फिर भी नेतन्याहू के सामने चुनौती

कान के सर्वे में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 27 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है, जो पिछले अनुमान से दो अधिक हैं। वहीं, गादी आइजेनकोट की याशर पार्टी को 21 सीटें मिलने की संभावना है, यानी उसे एक सीट का नुकसान हो सकता है।

लिकुड का सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरना नेतन्याहू के लिए राहत की खबर है, लेकिन इससे अपने आप सरकार बनाने का रास्ता साफ नहीं होता। गठबंधन के छोटे दलों का प्रदर्शन और दूसरी पार्टियों का रुख निर्णायक साबित हो सकता है। चैनल 13 के अनुमान में अरब-फिलिस्तीनी प्रतिनिधित्व वाली पार्टियों को कुल 18 सीटें मिलने की संभावना भी जताई गई है।

नेतन्याहू के समर्थकों को अब भी जीत की उम्मीद

यरुशलम स्थित लिकुड मुख्यालय में प्रधानमंत्री के समर्थकों ने निराशा के बजाय उम्मीद जताई। रॉयटर्स समाचार एजेंसी से बातचीत में समर्थक सिनाई एल मशली ने भरोसा जताया कि नेतन्याहू जीत हासिल करेंगे और विरोधी खेमे के कुछ यहूदी दल अंततः उनका साथ दे सकते हैं।

एक अन्य समर्थक श्लोमी वाकनिन ने लिकुड के सबसे बड़ी पार्टी बनने पर खुशी जताई। उनका मानना है कि नेतन्याहू अपने राजनीतिक अनुभव के दम पर सहयोगियों को एकजुट कर सकते हैं।

विदेश से लौटे 60 हजार से अधिक मतदाता

इस चुनाव को इजरायल की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 60 हजार से अधिक इजरायली नागरिक विदेश से मतदान करने के लिए स्वदेश लौटे। यह मतदान 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के बाद देश में हुए पहले चुनाव के रूप में भी खास अहमियत रखता है।

इजरायली समाज में दक्षिणपंथी विचारों का प्रभाव, खासकर युवा मतदाताओं के बीच, चुनावी समीकरण का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा है। हालांकि, अलग-अलग दलों को मिले वास्तविक वोट और सीटों की तस्वीर अंतिम परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

अब आगे क्या होगा?

यदि किसी भी खेमे को बहुमत नहीं मिलता, तो राष्ट्रपति की भूमिका और गठबंधन वार्ताएं सरकार गठन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकती हैं। दलों को संभावित सहयोगियों के साथ समझौते करने होंगे और समर्थन जुटाना होगा। इस प्रक्रिया में कई सप्ताह लग सकते हैं, जबकि राजनीतिक गतिरोध लंबा खिंचने की स्थिति में और अधिक समय लगना संभव है।

फिलहाल एग्जिट पोल को अंतिम चुनाव परिणाम नहीं माना जा सकता। असली सवाल यही है कि क्या नेतन्याहू अपने अनुभव के सहारे बहुमत जुटा पाएंगे या आइजेनकोट के नेतृत्व वाला विपक्ष सत्ता परिवर्तन की संभावना मजबूत करेगा।