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बिहार MLC चुनाव में बड़ा उलटफेर: 30 साल बाद ढहा नवल यादव का किला, पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा भी हारे

बिहार विधान परिषद चुनाव में बीजेपी के नवल किशोर यादव और कांग्रेस के मदन मोहन झा को हार का सामना करना पड़ा। नवल किशोर यादव 1996 से पटना शिक्षक सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे, जबकि मदन मोहन झा विधायक, राजस्व मंत्री और बिहार कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके हैं।
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पटना

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Anand Shekhar

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Updated: 28 Oct 2026, 10:00 AM IST

Bihar MLC Election

MLC चुनाव में हारे मदन मोहन झा और नवल किशोर यादव

Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। दशकों से शिक्षक राजनीति के केंद्र में रहे दो प्रमुख नेता अपनी-अपनी सीटें बचाने में नाकाम रहे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता नवल किशोर यादव, जो पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार पांच बार यानी 30 वर्षों तक एमएलसी रहे थे चुनाव हार गए हैं। वहीं, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व मंत्री डॉ. मदन मोहन झा को दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में करारी हार का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा, पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण, इन चारों शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के मौजूदा विधान परिषद सदस्यों (एमएलसी) को अपनी सीट गंवानी पड़ी है।

नवल किशोर यादव की तीन दशक की अजेय पारी का हुआ अंत

डॉ नवल किशोर यादव को लंबे समय से बिहार विधान परिषद में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के सबसे वरिष्ठ, प्रभावशाली और बेबाक प्रतिनिधि के रूप में देखा जाता रहा है। पटना के मसौढ़ी में जन्मे नवल किशोर 1990 के दशक से लगातार पटना शिक्षक सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे थे और पार्टी से अलग शिक्षकों के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी।

मगध विश्वविद्यालय से पीएचडी करने वाले नवल किशोर शुरुआत में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से जुड़े थे, बाद में वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए, जहां उन्होंने विधान परिषद में पार्टी के मुख्य सचेतक के रूप में भी काम किया। सत्ता में चाहे कोई भी पार्टी रही हो, नवल यादव सदन में शिक्षकों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों के मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाने के लिए जाने जाते थे।

नवल किशोर की हार का मुख्य कारण सरकार के प्रति शिक्षकों में बढ़ता असंतोष माना जा रहा है, जो तबादलों, पोस्टिंग, प्रमोशन और सेवा नियमों से जुड़े मुद्दों के कारण पैदा हुआ था। जिसका खामियाजा नवल किशोर यादव को भुगतना पड़ा। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार डॉ. संजीव कुमार ने शिक्षकों के बीच पनपे इस असंतोष का फायदा उठाया और तीन दशक पुराने राजनीतिक किले को ढहा दिया।

डॉ. मदन मोहन झा की हुई हार

दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव हारने वाले डॉ. मदन मोहन झा बिहार के सबसे प्रमुख राजनीतिक परिवारों में से एक से आते हैं। वे बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय नागेंद्र झा के बेटे हैं। डॉ. झा बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं और महागठबंधन सरकार में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री का पद भी संभाल चुके हैं।

मदन मोहन झा राजनीति के अलावा शैक्षणिक क्षेत्र से भी गहराई से जुड़े रहे हैं और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से जुड़े शिक्षकों और प्रोफेसरों के बीच उनका काफी प्रभाव रहा है। एक सौम्य नेता के रूप में पहचाने जाने वाले डॉ. झा बातचीत और चर्चा को प्राथमिकता देते हैं।

डॉ. मदन मोहन झा की हार का एक कारण यह माना जा रहा है कि वे स्थानीय शिक्षकों की रोजमर्रा की चुनौतियों से कटे हुए थे। इसके अलावा, जमीनी स्तर पर एक नए राजनीतिक विकल्प की बढ़ती चाहत ने भी उनकी हार में बड़ी भूमिका निभाई। जन सुराज समर्थित उम्मीदवार डॉ. सुरेश प्रसाद राय ने स्थानीय स्तर पर शिक्षकों के साथ मजबूत संबंध बनाए और एक सीधे मुकाबले में मदन मोहन झा को हरा दिया।

सभी चार सीटों पर बदलाव

इस चुनाव में शिक्षक-मतदाताओं ने विधान परिषद के किसी भी मौजूदा प्रतिनिधि को फिर से सदन जाने का मौका नहीं दिया। नवल किशोर यादव और मदन मोहन झा के अलावा तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से वामदल के मौजूदा एमएलसी संजय कुमार सिंह को भी हार का सामना करना पड़ा; वहां भाजपा के नरेंद्र प्रसाद सिंह विजयी रहे। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट पर मौजूदा एमएलसी अफाक अहमद भी चुनाव हार गए। इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार और भाजपा से बागी हुए राहुल राज ने जीत हासिल की, जबकि एनडीए समर्थित जदयू उम्मीदवार तीसरे स्थान पर खिसक गए।