
Iran US Tension: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर हालात बिगड़ने लगे है। दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को लेकर एक बार फिर ईरान और अमेरिका आमने-सामने आ गए हैं। जहां पर जर्मनी ने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए इस रणनीतिक रास्ते को बिना किसी शर्त के तुरंत खोलने की मांग की है। वहीं पर ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म नहीं करता और नुकसान का मुआवजा नहीं देता, तब तक इस जलमार्ग से तनाव खत्म नहीं होगा।
मामले को सुलझाने के लिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के बीच फोन पर बातचीत हुई है। जर्मनी ने कहा है कि वैश्विक समुद्री व्यापार और जहाजों की सुरक्षा के लिए होर्मुज मार्ग को बिना किसी शर्त के तुरंत बहाल किया जाना चाहिए।
हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि इस मार्ग में शांति तभी संभव है जब अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाइयों और ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत रोके। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि यह रणनीतिक जलमार्ग बंद होता है, तो इससे पैदा होने वाले वैश्विक आर्थिक संकट का जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ अमेरिका होगा।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने बताया कि होर्मुज मार्ग से जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए पड़ोसी देश ओमान के साथ एक समझौते पर सहमति लगभग बन चुकी है। हालांकि, इसे खोलने के लिए ईरान ने अमेरिका के सामने एक और शर्त रख दी है। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने पूर्व में हुए समझौतों का जो उल्लंघन किया है, उसके बदले उसे मुआवजा देना होगा।
तनाव के बीच ईरान ने अपनी आंतरिक रणनीति भी मजबूत कर ली है। ईरान की संसद ने होर्मुज और फारस की खाड़ी की सुरक्षा एवं प्रगति के लिए एक विशेष रणनीतिक प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है। इस योजना का मकसद क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करना और अमेरिकी दबाव का सामना करना है।
अमेरिकी आर्थिक दबाव का जवाब देते हुए ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बकाई ने वाशिंगटन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब भी अमेरिका कूटनीति में नाकाम रहता है, वह प्रतिबंधों का सहारा लेता है। अमेरिका को प्रतिबंध लगाने की एक खतरनाक लत लग चुकी है, जिसने उसकी सोचने-समझने की क्षमता को खत्म कर दिया है।
ईरान का यह बयान अमेरिकी खजाना सचिव स्कॉट बेसेंट के उस दावे के बाद आया है, जिसमें बेसेंट ने कहा था कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान का 'दम घुट' रहा है और अमेरिका, डिजिटल करेंसी व शैडो बैंकिंग के जरिए चल रहे ईरान के अवैध वित्तीय नेटवर्क को पूरी तरह तबाह कर देगा।