
Operation Sindoor: 'ऑपरेशन सिंदूर' ने पाकिस्तान के आतंकी ढांचे को तगड़ा झटका दिया है। जिसके चलते ISI को जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव करना पड़ा है।
पाकिस्तान के अपने ही खुफिया आकलन के अनुसार, बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय और मुरिदके में लश्कर-ए-तैयबा के मुख्य प्रशिक्षण केंद्र के नष्ट होने से यह साफ हो गया कि बड़े और एक ही जगह पर केंद्रित आतंकी ठिकाने कितने असुरक्षित हैं।
ISI ने जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन के सरगनाओं के साथ मिलकर यह आकलन किया। इसमें यह बात सामने आई कि भारतीय सशस्त्र बल इन आतंकी ठिकानों को आसानी से निशाना बना सकते थे, क्योंकि ये सभी एक ही जगह पर मौजूद थे।
ISI ने सुझाव दिया कि पाकिस्तान भर में कई अलग-अलग ठिकाने बनाए जाएं, न कि केवल एक मुख्य कमांड या प्रशिक्षण केंद्र पर निर्भर रहा जाए। एक अधिकारी ने बताया कि जैश-ए-मोहम्मद ने तुरंत अपना बहावलपुर मुख्यालय फिर से खड़ा कर लिया, लेकिन वहां गतिविधियां बहुत ही कम या न के बराबर हैं।
अधिकारी के मुताबिक, आज यह मुख्यालय केवल एक प्रतीकात्मक ढांचा बनकर रह गया है। अगर वे इसे दोबारा नहीं बनाते, तो पहले से ही हताश और निराश चल रहे उनके आतंकियों (कैडरों) पर इसका बहुत बुरा असर पड़ता।
हिज्बुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा के मामले में भी यही स्थिति है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद लश्कर-ए-तैयबा ने भी मुरिदके स्थित अपने प्रशिक्षण केंद्र को फिर से बना लिया। खुफिया जानकारी से पता चलता है कि मुरिदके में गतिविधियां बहुत कम हैं। इसे बहुत जल्दी फिर से तैयार किया गया, क्योंकि लश्कर-ए-तैयबा अपने आतंकियों को एक संदेश देना चाहता था।
मुरिदके का यह प्रशिक्षण केंद्र भारत के खिलाफ लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों का एक अहम हिस्सा रहा है। मुंबई में 26/11 के हमले, 2005 में दिल्ली में हुए बम धमाकों और 2000 में लाल किले पर हुए हमले को अंजाम देने वाले आतंकवादियों को इसी केंद्र में प्रशिक्षित किया गया था। इसके अलावा, मुरीदके स्थित केंद्र का इस्तेमाल जैश-ए-मोहम्मद के कैडरों ने भी किया था—जो उस समय एक अपेक्षाकृत नया संगठन था—ताकि वे 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले के लिए ट्रेनिंग ले सकें।
ISI ने हिजबुल मुजाहिदीन को भी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के कोती में स्थित उसके ट्रेनिंग और ट्रांजिट सेंटर, 'मरकज राहील शहीद' को फिर से बनाने में मदद की है। यहां तक कि सियालकोट में स्थित 'मेहमूना जया' कैंप को भी हिजबुल मुजाहिदीन और ISI ने फिर से बहाल कर दिया है।
इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के एक अधिकारी ने बताया कि ISI की इस पुनर्निर्माण प्रक्रिया के दौरान पकड़े गए संदेशों (इंटरसेप्ट्स) से साफ पता चलता है कि दोबारा बनाए गए ये केंद्र केवल प्रतीकात्मक (सिंबॉलिक) होंगे। स्थापित किए गए इन कई ट्रेनिंग केंद्रों से सभी बड़े हमलों को अंजाम नहीं दिया जाएगा। ISI ने उन्हें निर्देश दिया है कि इन केंद्रों में ट्रेनिंग लेते समय वे पूरी तरह से 'लो प्रोफाइल' बनाए रखें (यानी किसी का ध्यान उन पर न जाए)।