
Israel Hezbollah Ceasefire Lebanon: लेबनान में इस महीने दो बार सीजफायर की घोषणा होने के बावजूद इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष थमता नहीं दिख रहा है। हालात ऐसे हैं कि युद्धविराम लागू होने के कुछ घंटों बाद ही दोनों पक्षों के बीच फिर से लड़ाई शुरू हो गई। इसकी बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि दोनों पक्ष अलग-अलग समझौतों और उनकी शर्तों को अलग तरीके से देख रहे हैं।
इसी बीच लेबनान की सिविल डिफेंस एजेंसी के अनुसार, आज शनिवार को दक्षिणी लेबनान के नबातियेह जिले में इजरायली हमलों में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई जबकि 12 अन्य घायल लोग इसमें घायल हो गए। एजेंसी ने बताया कि उसके कर्मचारी सुबह से ही हमलों से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य में जुटे रहे।
महीने की शुरुआत में इजरायल ने एक ऐसे युद्धविराम पर सहमति जताई थी जिसके तहत उसकी सेना दक्षिणी लेबनान में बनी रह सकती थी। इसके अलावा इजरायल को हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने की भी अनुमति थी। हालांकि ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह ने इस समझौते को स्वीकार नहीं किया था।
इस समझौते के तहत दक्षिणी लेबनान में कुछ क्षेत्रों को लेबनानी सशस्त्र बलों के नियंत्रण में देने के लिए 'पायलट जोन' बनाए जाने थे ताकि सेना धीरे-धीरे इलाके का नियंत्रण संभाल सके। हालांकि यह प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है।
दूसरी तरफ, हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौते में सभी मोर्चों पर स्थायी रूप से सैन्य कार्रवाई रोकने की बात कही गई है जिसमें लेबनान भी शामिल है।
हालांकि रिपोर्टों के मुताबिक इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कहा है कि वह इजरायल को इस नए समझौते से बंधा हुआ नहीं मानते हैं। यही वजह है कि सीजफायर को लेकर दोनों पक्षों की व्याख्या अलग-अलग नजर आ रही है।
शुक्रवार को जारी एक बयान में हिजबुल्लाह ने इजरायल पर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। संगठन ने कहा कि इजरायल का यह दावा गलत है कि उसे किसी भी खतरे को खत्म करने के लिए स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने की छूट मिली हुई है।
हिजबुल्लाह के अनुसार, समझौते में ऐसी कोई शर्त शामिल नहीं है जो इजरायल को एकतरफा सैन्य कार्रवाई की अनुमति देती हो।
मामले से जुड़े कई सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार शाम इजरायल और हिजबुल्लाह युद्धविराम को फिर से लागू करने पर सहमत हो गए थे। हालांकि इस संबंध में कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ और न ही इसकी शर्तों को सार्वजनिक किया गया। यही वजह है कि जमीन पर स्थिति स्पष्ट नहीं है और संघर्ष पूरी तरह रुकता दिखाई नहीं दे रहा।
लेबनान में जारी हिंसा का असर अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ताओं पर भी पड़ रहा है। ईरान ने साफ कहा है कि जब तक लेबनान में लड़ाई पूरी तरह समाप्त नहीं होती तब तक वह अमेरिका के साथ बातचीत में हिस्सा नहीं लेगा।
ऐसे में बार-बार टूट रहे युद्धविराम का असर सिर्फ लेबनान तक सीमित नहीं है। इससे अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत भी प्रभावित हो सकती है, जो पहले से ही तय समयसीमा के दबाव में है।
मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ी समस्या यह है कि लेबनान में एक साथ दो अलग-अलग युद्धविराम व्यवस्थाओं की चर्चा हो रही है। एक तरफ महीने की शुरुआत में हुआ वह समझौता है जिसके तहत इजरायल खुद को हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त मानता है। दूसरी तरफ अमेरिका-ईरान समझौता है जो लेबनान समेत सभी मोर्चों पर स्थायी रूप से लड़ाई रोकने की बात करता है।
इसी विरोधाभास के कारण हिजबुल्लाह और इजरायल दोनों एक-दूसरे पर युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं। नतीजतन सीजफायर लागू होने के बावजूद लेबनान में संघर्ष लगातार जारी है।