Defense Power: रमजान के पवित्र महीने में इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान में बम धमाके कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। 3450 आर्टिलरी के साथ इजराइल ने 4 गुना बड़ी ईरानी सेना को डिफेंस पावर में कैसे पीछे छोड़ दिया है, जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी।
Israel-Iran War : रमजान के पवित्र महीने में मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) की शांति एक बार फिर बारूद के धुएं (Tehran bomb blast during Ramadan) में खो गई है। इजरायल ने आक्रामक रुख अपनाते हुए सीधे ईरान की राजधानी तेहरान को निशाना (Israel Iran war latest update) बनाया है। तेहरान के भीतर हुए 3 बड़े बम धमाकों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इन धमाकों के बाद सीजफायर (युद्ध विराम) की सारी उम्मीदें टूट गई हैं। दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि अगर एक पूर्णकालिक युद्ध छिड़ता है, तो इजरायल और ईरान की डिफेंस पावर (Iran Israel military power comparison) के मुकाबले में कौन किस पर भारी पड़ेगा। आइए मीडिया रिपोटर्स के अनुसार ताजा आंकड़ों और सैन्य क्षमता के आधार पर समझते हैं कि इस जंग (Middle East tension news today) में किसका पलड़ा भारी है।
इजरायल के पास 3450, ईरान के पास महज 1000 किसी भी जमीनी युद्ध या सीमा पार हमलों में आर्टिलरी (तोपखाने) की भूमिका सबसे अहम होती है। मारक क्षमता के इस मोर्चे पर इजरायल, ईरान से बहुत आगे है। रक्षा आंकड़ों के अनुसार, इजरायल के पास 3450 आर्टिलरी (तोपखाने और उन्नत गोलाबारी सिस्टम) मौजूद हैं, जो सटीक और विध्वंसक हमले करने में सक्षम हैं। इसके उलट, आकार और सैन्य नफरी में बड़ा होने के बावजूद ईरान के पास लगभग 1000 आर्टिलरी ही हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर दोनों देशों के बीच सीधा और लंबा जमीनी टकराव होता है, तो इजराइल अपनी भारी आर्टिलरी पावर के दम पर दुश्मन के ठिकानों पर लगातार और ज्यादा मारक गोलाबारी कर सकता है। इजराइल की इस तकनीकी और संख्यात्मक बढ़त के आगे ईरान का तोपखाना काफी कमजोर नजर आता है।
ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसकी विशाल सेना और 'रेवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) है। ईरान के पास 6 लाख 10 हजार से अधिक सक्रिय सैनिक हैं, जबकि इजराइल के पास 1 लाख 70 हजार सक्रिय और लगभग 4 लाख रिजर्व सैनिक हैं। हालांकि ईरान सैनिकों की संख्या में आगे है, लेकिन आधुनिक युद्ध तकनीक से लड़े जाते हैं, भीड़ से नहीं।
इजराइल की सैन्य ताकत का आधार उसकी अत्याधुनिक तकनीक है। उसके पास दुनिया के सबसे बेहतरीन एफ-35 (F-35) फाइटर जेट्स की फ्लीट है। वहीं, हवाई हमलों से बचने के लिए इजराइल का 'आयरन डोम' (Iron Dome), 'डेविड स्लिंग' और 'एरो सिस्टम' दुनिया के सबसे अभेद्य मिसाइल डिफेंस सिस्टम माने जाते हैं। दूसरी तरफ ईरान के पास दशकों पुराने विमान हैं और वह मुख्य रूप से अपने प्रॉक्सी नेटवर्क्स (हूती, हिजबुल्लाह) और सस्ती ड्रोन तकनीक (जैसे शाहेद ड्रोन) पर निर्भर है।
दशकों तक इजराइल और ईरान एक-दूसरे से सीधे नहीं टकराए। उनके बीच हमेशा 'शैडो वॉर' (पर्दे के पीछे का युद्ध) चला, जिसमें खुफिया एजेंसियों (मोसाद बनाम ईरानी इंटेलिजेंस) का इस्तेमाल हुआ। लेकिन 2024 के बाद से यह पैटर्न टूट गया है। ईरान द्वारा इजराइल पर सीधे मिसाइलें दागने के बाद अब इजराइल ने रमजान के महीने में तेहरान के दिल में 3 धमाके करके बता दिया है कि उसकी पहुंच और मारक क्षमता कितनी गहरी है।
तेहरान में हुए इन हमलों पर वैश्विक हलचल तेज हो गई है। अमेरिका ने इस घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए रखने की बात कही है, जबकि रूस और चीन ने इसे मध्य पूर्व को एक बड़े युद्ध की ओर धकेलने वाला कदम बताया है। अरब देशों में भी इस हमले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, और संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल शांति की अपील की है।
इन धमाकों के तुरंत बाद ईरान के सुप्रीम लीडर ने सेना और रेवोल्युशनरी गार्ड्स के कमांडरों के साथ एक आपात बैठक की है। पूरे ईरान की एयर डिफेंस प्रणालियों को 'हाई अलर्ट' पर रखा गया है। ऐसा माना जा रहा है कि ईरान जल्द ही अपनी बैलिस्टिक मिसाइल यूनिट्स के जरिये कोई बड़ा पलटवार कर सकता है, जिसके लिए इजरायली सेना ने भी अपनी सीमा पर आर्टिलरी और डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया है।