
इज़रायल (Israel) और लेबनान (Lebanon) के आतंकी संगठन हिज़बुल्लाह (Hezbollah) के बीच जंग जारी है। अमेरिका (United States of America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के कई बार मना करने के बावजूद इज़रायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) के आदेश पर उनकी सेना लगातार साउथ लेबनान में हमले कर रही है और आज एक बार फिर इज़रायली सेना ने साउथ लेबनान में कहर बरपाया है।
इज़रायली सेना ने साउथ नबातीह ज़िले में कफ़र तेबनित के बाहरी इलाक़े में हवाई हमले किए हैं। इसके साथ ही इज़रायली सेना ने नबातीह अल-फ़ौक़ा शहर में भी छापेमारी की और अली अल-ताहेर की पहाड़ियों और शहर के बाहरी इलाक़ों पर गोलाबारी की। इज़रायली हमलों से कितना नुकसान हुआ, फिलहाल इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
इज़रायली सेना के हमलों का बदला लेने के लिए हिज़बुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई की है। हिज़बुल्लाह के आतंकियों ने कफ़र तेबनित के पास इज़रायली सेना पर 10 रॉकेट्स दागे। इज़रायली सेना ने इन हमलों में हुए नुकसान के बारे में अभी कोई बयान जारी नहीं किया है।
लेबनान पर इज़रायली हमलों का ईरान (Iran) शुरू से विरोध कर रहा है। अमेरिका से हुए शांति समझौते पर भी ईरान ने कहा है कि अगर इज़रायल ने लेबनान पर हमले जारी रखे, तो इसे अमेरिका के साथ हुई डील का उल्लंघन माना जाएगा। ट्रंप भी नहीं चाहते कि अमेरिका-ईरान डील में कोई भी परेशानी आए और इसी वजह से वह नेतन्याहू से लेबनान पर हमले रोकने के लिए कह रहे हैं। पिछली दो बार फोन पर बातचीत के दौरान ट्रंप ने नेतन्याहू को फटकार भी लगाई थी। हालांकि इसका भी कोई असर नहीं हुआ और लेबनान पर इज़रायली हमलों का सिलसिला पहले की तरह बना हुआ है।
इज़रायल ने 2 मार्च से लेबनान पर हमले तेज़ कर दिए थे। इन हमलों को रोकने के लिए में इस जंग को रोकने के लिए ट्रंप की मध्यस्थता में 16 अप्रैल को पहली बार दोनों देशों में 10 दिन का सीज़फायर हुआ, लेकिन जंग नहीं रुकी। इसकी डेडलाइन खत्म होने के बाद सीज़फायर को 3 हफ्ते के लिए बढ़ा दिया गया था, लेकिन फिर भी जंग जारी रही। 15 मई को एक बार फिर दोनों देशों के बीच 45 दिन के सीज़फायर की सहमति बनी, लेकिन जंग खत्म नहीं हुई। 3 जून को एक बार फिर सीज़फायर पर सहमति बनी, लेकिन अभी भी इज़रायल के हमले जारी हैं।