Ballistic Missiles: पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल गहरा गए हैं। इजराइल ने ईरान पर मिसाइलें दागी हैं, जिसके बाद क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले की आशंका बढ़ गई है।
Iran-Israel Missile Attack: मध्य पूर्व से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। इजराइल ने अपनी रक्षा रणनीति के तहत ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर भीषण हमला (Ballistic Missiles) किया है। हमले में ईरान के 26 जनों की मौत हो गई। मरने वालों में 14 महिलाएं भी शामिल हैं। ईरान ने कहा है कि उसने 70 मिसाइल बेस इस्तेमाल नहीं किए। ईरान ने नेगेव और डिमोना को निशाना बनाया। इस सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव (Geopolitical Tension) चरम पर पहुंच गया है। स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों ने नागरिकों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे अमेरिकी सैनिकों (US Soldiers) के ठिकानों और कैम्पों से तुरंत दूरी बना लें। खुफिया रिपोर्ट्स (Intelligence Reports) में अंदेशा जताया गया है कि ईरान अपनी जवाबी कार्रवाई (Retaliatory Strike) में इन अड्डों को निशाना बना सकता है, जिससे जान-माल का बड़ा नुकसान होने का खतरा है।
इजराइली डिफेंस फोर्सेज ने पुख्ता जानकारी दी है कि उन्होंने ईरान के उन ठिकानों को सफलतापूर्वक ध्वस्त किया है, जहां से इजराइल के खिलाफ साजिशें रची जा रही थीं। इन हमलों में उन्नत किस्म की मिसाइलों का प्रयोग किया गया है। ईरान के प्रमुख शहरों में धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। हालांकि, ईरान ने अपने रक्षा तंत्र की ओर से कई मिसाइलें रोकने का दावा किया है, लेकिन धरातल पर तबाही के निशान कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। इस हमले के बाद पूरे तेहरान में अफरा-तफरी का माहौल है।
इस युद्ध की सबसे बड़ी संवेदनशीलता उन अमेरिकी सैन्य अड्डों को लेकर है जो ईरान के पड़ोस में स्थित हैं। ईरान ने पहले भी चेतावनी दी थी कि यदि इजराइल हमला करता है, तो वह अमेरिका को भी इसका जिम्मेदार मानेगा। इसी खतरे को देखते हुए प्रशासन ने एडवाइजरी जारी कर लोगों को उन इलाकों से हटने के लिए कहा है जहां अमेरिकी सेना तैनात है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के 'प्रॉक्सी संगठन' किसी भी समय इन अड्डों पर ड्रोन या रॉकेट से हमला कर सकते हैं।
दुनिया के तमाम बड़े देश इस वक्त सांस रोक कर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह हमला सिर्फ दो देशों के बीच की जंग नहीं है, बल्कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) और कच्चे तेल की सप्लाई चैन पर भी गहरा असर पड़ेगा। यदि खाड़ी देशों में संघर्ष बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आना तय है। भारत समेत कई देश अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए रेस्क्यू प्लान तैयार कर रहे हैं।
वर्तमान में ईरान की 'रिवोल्युशनरी गार्ड्स' को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इजराइल ने भी अपनी सीमाओं पर 'आयरन डोम' और अन्य सुरक्षा प्रणालियों को सक्रिय कर दिया है। लोगों से अपील की गई है कि वे केवल विश्वसनीय सरकारी सूचनाओं पर ही ध्यान दें और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से बचें। इस क्षेत्र के हवाई मार्ग (Airspace) को बंद कर दिया गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के मार्ग बदल दिए गए हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने बयान जारी कर कहा है कि वे अपनी सेना की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वहीं, रूस ने इजरायल के इस कदम को उकसावे वाली कार्रवाई बताया है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने आम नागरिकों के हताहत होने पर चिंता जताई है।
इधर अगले 24 से 48 घंटे बेहद निर्णायक होने वाले हैं। ईरानी सुप्रीम लीडर की ओर से आने वाला बयान तय करेगा कि क्या यह युद्ध और भीषण रूप लेगा या अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण थम जाएगा। हमारी टीम लगातार जमीनी इनपुट पर नजर बनाए हुए है। इस हमले का सीधा असर क्रिप्टो मार्केट और शेयर बाजार पर भी देखने को मिला है। जैसे ही मिसाइल हमले की खबर आई, ग्लोबल मार्केट में गिरावट शुरू हो गई। निवेशक सुरक्षित ठिकानों जैसे सोने (Gold) की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे कीमती धातुओं के भाव बढ़ सकते हैं।