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Israel-Iran War: इजराइल ने दागीं घातक मिसाइलें, ईरान ने दी अमेरिकी ठिकानों से दूर रहने की चेतावनी

Middle East Tension: पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है; इजराइल की ओर से ईरान पर किए गए मिसाइल हमले के बाद स्थानीय नागरिकों को अमेरिकी सैन्य ठिकानों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

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भारत

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MI Zahir

Mar 27, 2026

Israel Syria Airstrikes

Israel attacks Iran (Photo : IANS)

Israel-Iran Missile Attack: मध्य पूर्व से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां इजराइल ने अपनी रक्षा और जवाबी कार्रवाई का हवाला देते हुए ईरान ( Iran) के सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों (Ballistic Missiles) से हमला कर दिया है। इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में रेड अलर्ट (Red Alert) जारी कर दिया गया है और सुरक्षा विशेषज्ञों ने इसे एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध (Regional War) की शुरुआत बताया है। स्थानीय प्रशासन ने एक बेहद महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी करते हुए आम नागरिकों को निर्देश दिया है कि वे किसी भी स्थिति में अमेरिकी सैनिकों (US Soldiers) के ठिकानों या उनके कैम्पों के आसपास न रहें, क्योंकि ईरान की ओर से होने वाली जवाबी कार्रवाई में इन्हें निशाना बनाया जा सकता है।

हमलों की तीव्रता और ईरान की स्थिति (Strategic Military Targets)

इजराइली रक्षा बलों ने साफ कर दिया है कि यह हमला ईरान की ओर से पिछले दिनों की गई उकसावे वाली कार्रवाई का परिणाम है। जानकारी के अनुसार, मिसाइलों ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को नुकसान पहुंचाया है। ईरान के रक्षा तंत्र ने कुछ मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है, लेकिन धरातल पर हुए नुकसान की तस्वीरें भयावह स्थिति की ओर इशारा कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस बात को लेकर चिंतित है कि क्या यह संघर्ष एक पूर्ण युद्ध में तब्दील हो जाएगा।

अमेरिकी ठिकानों पर खतरे का साया (US Military Bases in Danger)

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा को लेकर दी गई चेतावनी है। सूत्रों के मुताबिक, खुफिया इनपुट मिले हैं कि ईरान अपने ऊपर हुए हमले का बदला लेने के लिए पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेस को निशाना बना सकता है। यही कारण है कि लोगों को उन इलाकों को तुरंत खाली करने या वहां से दूरी बनाए रखने को कहा गया है जहाँ अमेरिकी सेना तैनात है। पेंटागन इस स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है और अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रखा है।

कूटनीतिक हलचल और वैश्विक प्रतिक्रिया (Global Diplomatic Crisis)

दुनिया भर के देशों ने इस हमले पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। जहाँ अमेरिका और पश्चिमी देश इजराइल के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन कर रहे हैं, वहीं रूस और चीन ने संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव कम नहीं हुआ, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ेगा।

आम जनता के लिए सुरक्षा निर्देश (Public Safety Measures)

ईरान और आसपास के क्षेत्रों में रह रहे भारतीय नागरिकों और अन्य प्रवासियों को अपने दूतावासों के संपर्क में रहने की सलाह दी गई है। किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने को कहा गया है। युद्धग्रस्त क्षेत्रों के पास की हवाई सीमा को बंद कर दिया गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी बड़ा असर पड़ा है।

इजराइल का यह कदम 'प्रोएक्टिव डिफेंस' का हिस्सा

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इजराइल का यह कदम 'प्रोएक्टिव डिफेंस' का हिस्सा है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए "कठोर परिणाम" भुगतने की धमकी दी है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह अपने सहयोगियों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले घंटों में ईरान की 'रिवोल्युशनरी गार्ड्स' की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। क्या ईरान सीधे इजरायल पर हमला करेगा या अपने प्रॉक्सी संगठनों (हिजबुल्लाह, हूती) के जरिए मोर्चा खोलेगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। फिलहाल, तेल अवीव और तेहरान दोनों जगहों पर बंकरों को सक्रिय कर दिया गया है।

शुरू हो सकता है महंगाई का नया दौर

इस युद्ध का एक आर्थिक पहलू भी है। हमले की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 4% से ज्यादा का उछाल देखा गया है। यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो भारत समेत कई एशियाई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं और महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है।