
लेबनान (Lebanon) के आतंकी संगठन हिज़बुल्लाह (Hezbollah) को खत्म करने के लिए इज़रायल (Israel) के हमले जारी हैं। इस वजह से साउथ लेबनान में जान-माल का भारी नुकसान हो रहा है। शुक्रवार को दोनों पक्षों के बीच एक बार फिर सीज़फायर पर सहमति बनी, जो अमेरिका (United States of America) की मध्यस्थता में हुआ, लेकिन इसके कुछ देर बाद ही इज़रायल ने फिर से इसका उल्लंघन कर दिया।
साउथ लेबनान में इज़रायली हमले जारी हैं। शुक्रवार को तड़के सुबह इज़रायली सेना ने अपने हमले तेज़ कर दिए, जिनमें 47 लोग मारे गए और 97 घायल हो गए। इसके बाद ही दोनों पक्षों में अमेरिका की मध्यस्थता में सीज़फायर हुआ, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ और इज़रायली सेना लगातार साउथ लेबनान में बमबारी कर रही है।
इसी बीच ईरान (Iran) की तरफ से लेबनान पर इज़रायली हमलों पर प्रतिक्रिया आ गई है। ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री सईद खतीबज़ादेह (Saeed Khatibzadeh) ने कहा है कि लेबनान पर हमलों को रोकने के लिए अमेरिका को इज़रायल पर दबाव बनाना होगा क्योंकि ऐसा करने पर ही इज़रायल अपनी सैन्य कार्रवाई रोकेगा। फ्रांस (France) के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट (Jean-Noel Barrot) ने भी शुक्रवार को अमेरिका को सलाह दी थी कि लेबनान में हत्याओं को रोकने के लिए उसे इज़रायल पर दबाव बनाना चाहिए।
शुक्रवार को लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन (Joseph Aoun) ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत की। इस दौरान औन ने लेबनान पर इज़रायली हमलों को रोकना ज़रूरी बताया।
इज़रायल और लेबनान के बीच सिर्फ दिखावे का सीज़फायर चल रहा है। इज़रायल ने 2 मार्च से लेबनान पर हमले तेज़ कर दिए थे। इन हमलों को रोकने के लिए ट्रंप की मध्यस्थता में 16 अप्रैल को पहली बार दोनों देशों में 10 दिन का सीज़फायर हुआ, लेकिन जंग नहीं रुकी। इसकी डेडलाइन खत्म होने के बाद सीज़फायर को 3 हफ्ते के लिए बढ़ा दिया गया था, लेकिन फिर भी जंग जारी रही। 15 मई को एक बार फिर दोनों देशों के बीच 45 दिन के सीज़फायर की सहमति बनी, लेकिन जंग खत्म नहीं हुई। 3 जून को एक बार फिर सीज़फायर पर सहमति बनी, लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ। 19 जून को दोनों देशों में एक बार फिर सीज़फायर की सहमति बनी, लेकिन इज़रायल ने इसका भी उल्लंघन कर दिया।