
अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज के प्रमुख रहे वैज्ञानिक एंथनी फाउची। ( फोटो: @Dr_AnthonyFauci)
Anthony Fauci, Prominent American Scientist: पूरी दुनिया जिस कोविड से परेशान रही, जिसकी वजह से लाखों लोगों की जान गई,दुनिया यह समझती है कि वह वायरस चीन की वुहान लैब से फैला, लेकिन अब यह हकीकत यह सामने आई है कि अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज के प्रमुख रहते हुए बड़े वैज्ञानिक एंथनी फाउसी ने वुहान लैब की उस रिसर्च की फंडिंग की थी, जिससे यह वायरस फैला। यह शख्स सात अमेरिकी राष्ट्रपतियों का प्रमुख चिकित्सा सलाहकार निकला। कोविड फैलने के बाद सात साल बाद ताजा सुबूतों से यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है।
सुबूतों के अनुसार फाउसी ने सिर्फ खुफिया जानकारी में हेरफेर किया, बल्कि कांग्रेस के सामने से झूठ भी बोला। सवाल यह है कि आखिर यह रहस्य सात साल तक क्यों दबा रहा। ताजा खुलासे के मुताबिक वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (डब्ल्यूआईवी) में चमगादड़ कोरोना वायरस पर खतरनाक गेन-ऑफ-फंक्शन रिसर्च को फंडिंग करने के लिए अमेरिकी करदाताओं के लाखों डॉलर दिए थे,यह काम अब व्यापक रूप से उस अनजाने लैब लीक का स्रोत माना जाता है जिसने इस महामारी को जन्म दिया।
राष्ट्रीय खुफिया निदेशक रहीं तुलसी गबार्ड की ओर से जारी कि गए संचार और दस्तावेज से पता चलता है कि फाउसी ने खुफिया समुदाय के राजनीतिकरण से प्रभावित नेतृत्व के साथ मिलकर अपने कार्यों, वायरस के प्रयोगशाला रिसाव के स्रोत और इस खतरनाक रिसर्च के लिए अमेरिकी धन के साथ अपनी भूमिका के बारे में सच्चाई दबाने की करतूत की, जिससे उसे बहुत नुकसान हुआ और लााखों जानें गईं। उसने 2024 में कांग्रेस से झूठ बोला, जब उसने शपथ पत्र में वायरल रिसर्च के बारे में खुफिया अधिकारियों के सामने चर्चाओं की जानकारी होने या उनमें भाग लेने से साफ तौर पर इनकार किया था।
अमेरिकी मीडिया के अनुसार डॉ. एंथनी फाउसी एक अमेरिकी इम्यूनोलॉजिस्ट और चिकित्सक-वैज्ञानिक है, उन्होंने 1984 से 2022 तक 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज' के निदेशक के रूप में कार्य किया और वे 1984 से 2022 तक सात अमेरिकी राष्ट्रपतियों के प्रमुख चिकित्सा सलाहकार रहे। उन्होंने एनआईए आईडी के प्रमुख के रूप में 38 से अधिक वर्षों तक संस्थान का नेतृत्व किया, जो संक्रामक रोगों और प्रतिरक्षा-मध्यस्थ रोगों पर केंद्रित है।
जब 1980 के दशक में जब एड्स महामारी के रूप में फैला तो उन्होंने इसके निदान और उपचार के लिए महत्वपूर्ण शोध किए और 'प्रेसीडेंट इमरजेंसी प्लान फॉर एड्स रिलीफ' के प्रमुख प्लानर्स में से एक थे। चिकित्सा और अनुसंधान के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें 2008 में अमेरिका के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, प्रेसीडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम से सम्मानित किया गया था। उनका पूरा कैरियर साक्ष्य-आधारित चिकित्सा और सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के कुशल प्रबंधन के लिए समर्पित रहा । वे दिसंबर 2022 में अपने पदों से सेवानिवृत्त हुए।
सैकड़ों ईमेल की समीक्षा के अनुसार, खुफिया समुदाय ने लगभग हमेशा ही उनकी सिफारिशों को शामिल किया। फाउसी ने एक फर्जी शोधपत्र को, जिसके प्रकाशन में उन्होंने खुद मदद की थी, खुफिया समुदाय के विचारार्थ वैध जानकारी के रूप में प्रस्तुत किया। वरिष्ठ विश्लेषकों ने फाउसी की प्रशंसा एक 'नीति निर्माता' के रूप में नहीं, बल्कि 'वास्तविक कोरोनावायरस विशेषज्ञों' के लिए एक निष्पक्ष मार्गदर्शक के रूप में की है, जबकि उन विशेषज्ञों की अनदेखी की, जो फाउसी के कथन से असहमत हो सकते थे।
जारी किए गए पत्र फउची के 2024 में कोरोना वायरस महामारी पर सदन की चुनिंदा उपसमिति के समक्ष दिए गए बयान का सीधा खंडन करते हैं। उस सुनवाई में, शपथ के तहत,उनसे बार-बार पूछा गया था कि क्या उन्होंने महामारी से पहले, उसके दौरान या उसके बाद 'वायरस अनुसंधान के संबंध में एफबीआई, सीआईए, डीआईए या किसी भी अमेरिकी खुफिया एजेंसी से बात की थी।' उन्होंने बार-बार सवालों से बचने की कोशिश की, और अंत में झूठा बयान दिया, 'कोविड के बारे में मेरी जानकारी में ऐसा कुछ नहीं हुआ।'
कई मुखबिरों की गवाही से पता चलता है कि जिन खुफिया विश्लेषकों ने फाउसी के कोविड-उत्पत्ति संबंधी निष्कर्षों को चुनौती दी, उन्हें प्रतिशोध की धमकी का सामना करना पड़ा, उन्हें हाशिये पर धकेल दिया गया और अक्सर उनके करियर में भी रुकावटें आईं। इससे असहमति को दबा दिया गया और एक ऐसे वर्क कल्चर को बढ़ावा मिला जहां सच को बलिदान कर दिया गया और विश्वसनीय सुबूतों को दबा दिया गया।
वे व्हिसलब्लोअर जिन्हें निदेशक तुलसी गबार्ड ने खुफिया समुदाय के महानिरीक्षक का हवाला दिया है। एक ठेकेदार को ओडीएनआई के सामने व्हिसलब्लोअर के रूप में सामने आने के कुछ ही दिनों बाद बर्खास्त कर दिया गया। प्रबंधकों ने प्रयोगशाला रिसाव की परिकल्पना का समर्थन करने वाले विश्लेषकों को याद दिलाया कि नेतृत्व ही यह तय करेगा कि किन विश्लेषकों को पदोन्नति मिलेगी। साफ मैसेज था कि हेरफेर किए गए निष्कर्ष से असहमति जताने पर कैरियर बर्बाद कर दिया जाएगा। आरोप है कि वरिष्ठ नेताओं ने मुखबिरों के लिए बाधाएं पैदा कीं, शिकायत प्रक्रिया खत्म करते हुए इस बात पर जोर दिया गया कि मैनेजर या वकील ओडीएनआई की बैठकों में मौजूद रहें, ताकि उन्हें डराने-धमकाने का माहौल बना जा सके।
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Updated on:
19 Jun 2026 06:34 pm
Published on:
19 Jun 2026 06:23 pm
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