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गाजा में हुई मंगेतर की मौत, डेढ़ साल बाद पोस्टमॉर्टम स्पर्म रिट्रीवल तकनीक की मदद से मां बनी इजराइली महिला

गाजा में मारे गए एक इजराइली व्यक्ति की मंगेतर ने उनकी मृत्यु के डेढ़ साल बाद पोस्टमॉर्टम स्पर्म रिट्रीवल (PSR) तकनीक का उपयोग करके उनके बच्चे को जन्म दिया है, जिसे उन्होंने 'दुश्मन को जवाब' बताया है। युद्ध के बाद इजराइल में इस तकनीक की मांग बढ़ गई है।

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Nov 17, 2025
डॉ. हदास लेवी उनके मंगेतर कैप्टन नेतनेल सिल्बर्ग और उनका बेटा (फोटो-पत्रिका ग्राफिक्स)

लंबे समय तक युद्ध की मार झेलने वाले इजराइल से सच्चे प्यार की एक अनोखी कहानी सामने आई है। यहां वॉर के दौरान गाजा में मारे गए एक इजराइली कैप्टन की मौत के डेढ़ साल बाद उनकी मंगेतर ने उनके बच्चे को जन्म दिया है। पोस्टमॉर्टम स्पर्म रिट्रीवल (PSR) तकनीक का इस्तेमाल कर के इस महिला ने बच्चे को जन्म दिया है। महिला ने बताया कि, जबे उसे अपने मंगेतर की मौत की खबर मिली उस वक्त पहले तो इस बात का विश्वास नहीं हुआ कि उसने अपना प्यार खो दिया है लेकिन इसके कुछ ही पल बाद उन्होंने तय कर लिया था कि वह अपने मंगेतर के बच्चे को जन्म देगी।

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35 साल की डॉ. हदास लेवी ने जून में दिया बच्चे को जन्म

35 साल की डॉ. हदास लेवी नामक इस महिला के मंगेतर कैप्टन नेतनेल सिल्बर्ग 18 दिसंबर 2023 को गाजा में मारे गए थे। दोनों की शादी नहीं हुई थी इसलिए सिल्बर्ग के बच्चे को जन्म देने के लिए लेवी को कानून से परमिशन लेनी जरूरी थी। उन्होंने 2024 में फैमिली कोर्ट में याचिका दायर करते हुए यह अपील की कि उन्हें उनके मंगेतर की ‘कॉमन-लॉ पार्टनर’ माना जाए और उनका शुक्राणु (स्पर्म) उपयोग लेने की अनुमती मिले। कोर्ट ने लेवी की अपील मंजूर कर ली जिसके बाद पोस्टमॉर्टम स्पर्म रिट्रीवल की प्रक्रिया शुरु की गई। इसकी मदद से लेवी ने 11 जून 2025 को एक बेटे को जन्म दिया। लेवी ने कहा, अब मैं सुबह उठकर खुशी महसूस कर सकती हूं। यह बच्चा दुश्मन को जवाब है, मैंने अपने परिवार की शाखा को टूटने नहीं दिया।

क्या है यह प्रक्रिया

इस प्रक्रिया में किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसके स्पर्म निकाल कर उपयोग किया जाता है। किसी मृत व्यक्ति की पार्टनर यदि उसके बच्चे को जन्म देना चाहती है तो ऐसी परिस्थिती में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। यह एक आर्टिफिशियल रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) जिसमें IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) की मदद से महिला को गर्भवती किया जाता है। डॉक्टर टेस्टिकल्स से सुई के जरिए स्पर्म वाला लिक्विड निकालते है और उसमें मौजूद जीवीत स्पर्म को फ्रीज कर लिया जाता है। इस प्रक्रिया को फ्रीज-थ्रॉ कहते है और इसकी मदद से सालों तक स्पर्म को सुरक्षित रखा जाता है। हालांकि इस प्रक्रिया में स्पर्म की क्षमता लगभग 39% कम हो जाती है।

हमास के हमलों के बाद इजराइल में तेजी से बढ़ी इसकी मांग

बता दें कि, इंसान की मौत के 24 से 36 घंटों तक उसका स्पर्म जीवित रहता है और हर घंटे उसकी क्षमता 2 % कम होती जाती है। इसी के चलते किसी व्यक्ति की मृत्यु के तुरंत बाद यह प्रक्रिया करनी होती है। इससे पहले कोर्ट की अनुमति लेनी होती है लेकिन युद्ध के दौरान कुछ समय के लिए इस प्रक्रिया को आसान कर दिया गया था। खबरों के अनुसार, हमास के हमलों के बाद इजराइल में तेजी से इस प्रक्रिया की मांग बढ़ने लगी है। इजराइली स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 250 सैनिकों की मौत के बाद उनके स्पर्म कलेक्ट किए गए है। इसमें से 193 मामलों में उनके माता पिता के अनुरोध पर यह किया गया है। सैनिकों के अलावा 21 नागरिकों के भी स्पर्म इस प्रकिया के तहत सुरक्षित किए गए है।

Updated on:
17 Nov 2025 04:38 pm
Published on:
17 Nov 2025 02:55 pm
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