Disclosure: अमेरिकी न्याय विभाग ने एपस्टीन मामले में 30,000 पन्नों का सबसे बड़ा खुलासा किया है, जिसमें ट्रंप के 8 बार निजी जेट में सफर और 3,500 नंगी तस्वीरों का जिक्र है। 'एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट' के तहत आए इन दस्तावेजों ने वैश्विक राजनीति में खलबली मचा दी है।
Jeffrey Epstein Records releases: क्रिसमस की पूर्व संध्या पर जब दुनिया की नज़रें रूस-यूक्रेन शांति योजना पर टिकी हुई थीं, ठीक उसी वक्त अमेरिका से आए 'एपस्टीन फाइल्स' के सबसे बड़े खुलासे ने पूरी दुनिया की राजनीति में हलचल मचा दी है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने जेफरी एपस्टीन मामले से जुड़े लगभग 30,000 पन्नों के नए दस्तावेज़ (Epstein Records Release 2025) सार्वजनिक किए हैं। यह खुलासा 'एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट' (Epstein Files Transparency Act )के तहत किया गया है, जिसने कई पुराने दबे हुए राज़ों से पर्दा उठा दिया है। हजारों नंगी तस्वीरें और डिजिटल सुबूत इस खुलासे का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा वह ईमेल है, जिसमें एफबीआई की ओर से की गई छापेमारी का विवरण है। दस्तावेज के अनुसार, "जांच एजेंसी ने एपस्टीन के न्यूयॉर्क और वर्जिन आइलैंड्स स्थित ठिकानों से लगभग 3,500 नंगी तस्वीरें और 40,000 अन्य डिजिटल फाइलें जब्त की थीं। ये आंकड़े इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि एपस्टीन का यौन शोषण नेटवर्क कितना विशाल और संगठित था।"
इन फाइलों में वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम एक बार फिर चर्चा में है। नए फ्लाइट लॉग्स से पता चला है कि ट्रंप ने सन 1993 से 1996 के बीच एपस्टीन के निजी विमान में कम से कम आठ बार सफर किया था। पहले की रिपोर्टों में यह संख्या कम बताई गई थी। हालांकि, न्याय विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन दस्तावेजों में नाम होने मात्र से किसी अपराध की पुष्टि नहीं होती है। ट्रंप ने इन खबरों को "पॉलिटिकल डिस्ट्रैक्शन" बताते हुए खारिज कर दिया है।
रिकॉर्ड्स में एक कथित पत्र भी शामिल था, जिसे एपस्टीन द्वारा जेल में बंद बदनाम डॉक्टर लैरी नासर को लिखा गया बताया जा रहा था। लेकिन एफबीआई की हैंडराइटिंग एक्सपर्ट टीम ने इसे 'फर्जी' करार दिया है। विभाग ने आगाह किया है कि सार्वजनिक किए गए सभी दस्तावेजों के दावों को बिना जांच के सच न माना जाए।
इस खुलासे पर राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। व्हाइट हाउस के सूत्रों का कहना है कि यह पारदर्शिता की जीत है, वहीं रिपब्लिकन खेमा इसे राष्ट्रपति ट्रंप की छवि बिगाड़ने की एक सोची-समझी साजिश बता रहा है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि तस्वीरों में दिख रहे अन्य प्रभावशाली लोगों की भी पहचान कर उन पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
जानकारी के अनुसार आने वाले दिनों में इन 30,000 पन्नों की और अधिक गहन समीक्षा की जाएगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इन फाइलों में कुछ ऐसे "डिजिटल फुटप्रिंट्स" हो सकते हैं, जो एपस्टीन के उन मददगारों तक पहुंचने में मदद करें, जो अब तक कानून की नज़र से बचे हुए हैं। साथ ही, ट्रंप की उड़ानों से जुड़े सह-यात्रियों की पहचान उजागर होने पर नए अदालती समन जारी हो सकते हैं।
एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि यह खुलासा ठीक उसी दिन हुआ जब यूक्रेन-रूस युद्ध विराम की खबरें चर्चा में थीं। कुछ विश्लेषक इसे 'न्यूज़ डंप' स्ट्रेटेजी मान रहे हैं, जहां बड़ी नकारात्मक खबरों को अन्य वैश्विक घटनाओं के शोर में दबाने की कोशिश की जाती है। इसके अलावा, $800 बिलियन के पुनर्निर्माण फंड और एपस्टीन मामले का एक साथ चर्चा में आना अमेरिकी प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है।
(इनपुट क्रेडिट: US Justice Dept. Transparency Cell)