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UAE War Warning: जेफरी सैक्स की चेतावनी-युद्ध में कूदे तो तबाह हो जाएंगे दुबई और अबू धाबी

Jeffrey Sachs Warning: मशहूर अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स ने चेतावनी दी है कि युद्ध में शामिल होने पर दुबई और अबू धाबी जैसे पर्यटन शहर पूरी तरह तबाह हो सकते हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने खाड़ी देशों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Mar 29, 2026
अमेरिका के मशहूर अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स। ( फोटो: ANI)

Global Geopolitics: अमेरिका के मशहूर अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स (Jeffrey Sachs) ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को लेकर एक बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि कि यदि यूएई किसी भी युद्ध (War) का हिस्सा बनता है, तो उसके शानदार शहर दुबई और अबू धाबी पल भर में खंडहर बन सकते हैं। सैक्स का मानना है कि ये शहर पर्यटन (Tourism) और निवेश के लिए बने हैं नहीं बने हैं, मिसाइल हमलों को झेलने वाले सैन्य किलों के रूप में। यूएई की मौजूदा विदेश नीति और अमेरिका-इज़राइल (US-Israel Alliance) के साथ उसके बढ़ते गठबंधन को सैक्स ने एक आत्मघाती कदम करार दिया है।

पर्यटन स्थलों पर मंडराता युद्ध का खतरा (Tourism Risk)

जेफरी सैक्स ने अपनी बातचीत में तर्क दिया कि दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों की पहचान उनकी भव्यता, लग्जरी रिसॉर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये जगहें "मिसाइल डिफेंस" (Missile Defense) के लिए अभेद्य किले नहीं हैं, बल्कि ये वे स्थान हैं, जहां दुनिया भर के रईस पार्टी करने और पैसा खर्च करने आते हैं। ऐसे में युद्ध के मैदान में उतरना इन शहरों के अस्तित्व के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। उनके अनुसार, यूएई ने खुद को एक ऐसी "बेतुकी मुसीबत" में डाल लिया है, जो उसका पूरा बुनियादी ढांचा नष्ट कर सकती है।

अब्राहम समझौते को बताया 'विनाश का निमंत्रण' (Abraham Accords)

सैक्स ने खाड़ी देशों की ओर से अमेरिका के साथ की गई सुरक्षा साझीदारी, विशेषकर अब्राहम समझौते (Abraham Accords) की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे "विनाश का निमंत्रण" बताते हुए कहा कि इन देशों ने अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह से अमेरिका पर निर्भर होकर बड़ी गलती की है। सैक्स ने पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर की एक मशहूर कहावत का हवाला देते हुए कहा, "अमेरिका का दुश्मन होना खतरनाक हो सकता है, लेकिन उसका दोस्त होना अक्सर घातक (Fatal) साबित होता है।"

अमेरिकी सैन्य अड्डों पर अति-निर्भरता (US Military Bases)

सैक्स ने खाड़ी देशों की सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये देश इस गलतफहमी में जी रहे हैं कि उनके यहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने (US Bases) उनकी हर स्थिति में रक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि इसी भरोसे के कारण ये देश बिना सोचे-समझे राजनीतिक सौदे कर रहे हैं। सैक्स ने यूएई को सलाह दी कि वह इस "हारने वाले सौदे" से पीछे हटे और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दे। उन्होंने यूएई की वर्तमान रणनीति को "भोलापन" करार दिया।

ईरान की जवाबी चेतावनी और क्षेत्रीय तनाव (Iran Threat)

यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब ईरान ने भी कड़ा रुख अपना रखा है। तेहरान ने हाल ही में पश्चिमी एशियाई देशों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे अपनी धरती और सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ अमेरिकी हमलों के लिए न होने दें। ईरान का कहना है कि यदि किसी भी देश के बेस से उस पर हमला हुआ, तो उसे भी आक्रामकता में भागीदार माना जाएगा और उसके परिणाम भुगतने होंगे। यह स्थिति पूरे मिडिल ईस्ट (Middle East Crisis) में तनाव को चरम पर ले जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़े विमर्श को जन्म

बहरहाल, जेफरी सैक्स का यह बयान अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़े विमर्श को जन्म देता है, जहाँ सुरक्षा के लिए केवल विदेशी ताकतों पर निर्भर रहना छोटे देशों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। इस बयान के बाद देखना होगा कि क्या यूएई अपनी रक्षा नीतियों में कोई बदलाव करता है या वह अमेरिका के साथ अपने रक्षा समझौतों को और मजबूत करने की दिशा में बढ़ता है। ( इनपुट: ANI)


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