Lebanon and Israel: इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल होने के बाद वाशिंगटन में 33 साल बाद लेबनान-इजरायल वार्ता हो रही है। हिजबुल्लाह ने समझौते को मानने से इनकार किया, जिससे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है।
Lebanon-Israel Talks: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता विफल रहने के बाद अब सभी की निगाहें लेबनान और इजरायल के बीच होने वाली बातचीत पर टिक गई हैं। 14 अप्रैल यानी आज अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में 33 साल बाद यह वार्ता होने जा रही है, क्योंकि दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं। इस बातचीत से पहले हिजबुल्लाह की तरफ से बड़ा बयान सामने आया है।
लेबनानी आतंकवादी समूह हिजबुल्लाह की ओर से कहा गया है कि उनका संगठन अमेरिका में लेबनान-इजरायल वार्ता के किसी भी समझौते का पालन नहीं करेगा। हिजबुल्लाह इन वार्ताओं का कड़ा विरोध करता है। हिजबुल्लाह की राजनीतिक परिषद के एक उच्च पदस्थ सदस्य वाफिक सफा ने वाशिंगटन में अमेरिकी प्रतिनिधियों के बीच होने वाली वार्ता से पूर्व यह बात कही।
उन्होंने यह भी कहा कि लेबनान और इजरायल के बीच इस वार्ता के परिणामों में हमारी कोई दिलचस्पी नहीं है और न ही हमें इससे कोई लेना-देना है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “वे जिस पर भी सहमत होंगे, हम उससे बंधे नहीं हैं।” उन्होंने यह बात कब्रिस्तान के पास कही, जबकि ऊपर एक इजरायली ड्रोन मंडरा रहा था।
इजरायल और लेबनान के बीच होने वाली बैठक अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की देखरेख में होगी। एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, इजरायल और लेबनान के बीच 1993 के बाद पहली बार बड़े स्तर पर सीधी बातचीत हो रही है।
लेबनान और इजरायल के बीच वाशिंगटन में वार्ता होनी है। इस वार्ता से पहले हिजबुल्लाह ने मंगलवार को कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। हिजबुल्लाह ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने बियादा शहर में इजरायल के नए स्थापित तोपखाने ठिकानों पर रॉकेटों से हमला किया। उसने यह भी कहा कि हमलावर ड्रोन ने कफ़र जलादी चौकी के पास एक फायर-कंट्रोल रूम पर हमला किया, जिसके बाद मिसगाव आम बस्ती को निशाना बनाकर रॉकेट दागे गए।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता इस सप्ताह फिर से इस्लामाबाद में हो सकती है। बातचीत का मुख्य उद्देश्य तनाव कम करना और व्यापक समझौते की दिशा में कदम तलाशना होगा।