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बांग्लादेश में खसरा का प्रकोप, अब तक 512 बच्चों की हुई मौत

Bangladesh's Measles Outbreak: बांग्लादेश में खसरा से स्थिति काफी खराब हो गई है। इस वजह से अब तक 512 बच्चे अपनी जान गंवा चुके हैं।

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May 24, 2026
Measles outbreak in Bangladesh

बांग्लादेश (Bangladesh) में इसी साल मार्च से शुरू हुए खसरा (Measles) के प्रकोप ने पूरे देश को हिला दिया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 23 मई 2026 तक संदिग्ध खसरा लक्षणों वाले बच्चों समेत कुल 512 मौतें हो चुकी हैं। पिछले 24 घंटों में ही 13 बच्चों की मौत हुई है, जिससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है। यह दशकों में बांग्लादेश का सबसे घातक खसरा प्रकोप माना जा रहा है।

चिंताजनक है स्थिति

बांग्लादेश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के आंकड़ों के अनुसार देशभर में खसरा के 62,507 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 8,494 मामलों की तो पुष्टि भी हो गई है। कुल 46,000 से ज़्यादा बच्चे अस्पताल में भर्ती हुए, जिनमें से करीब 42,000 ठीक होकर घर लौट चुके हैं। ज़्यादातर मामले और मौतें 6 महीने से 5 साल के बच्चों में हुई हैं। इस उम्र वर्ग के बच्चे देश में खसरा के कुल मामलों का लगभग 81% हिस्सा हैं। खसरा प्रकोप की वजह से बांग्लादेश में चिंताजनक स्थिति है।

पूरे देश में फैला खसरा

बांग्लादेश के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार खसरा का प्रकोप पूरे देश में फैल चुका है। 64 जिलों में से 58-61 जिलों को प्रभावित किया है। ढाका, राजशाही, चटगांव और खुलना डिवीज़न इस बीमारी के प्रकोप से सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं। घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में स्थिति सबसे खराब है। अस्पतालों पर भारी दबाव है। जगह और संसाधनों की कमी के कारण मरीजों को जल्दी डिस्चार्ज करने के मामले भी सामने आए हैं।

क्या है बांग्लादेश में खसरा प्रकोप फैलने का मुख्य कारण?

बांग्लादेश में खसरा प्रकोप का मुख्य कारण वैक्सीनेशन में भारी गिरावट है। 2025 में पात्र बच्चों में खसरा की वैक्सीन लगवाने का आंकड़ा सिर्फ लगभग 59% रह गया था, जबकि पहले यह 90% के आसपास था। कोविड महामारी के बाद वैक्सीनेशन कार्यक्रमों में आए व्यवधान, जागरूकता की कमी और कुछ अन्य कारकों ने बच्चों को संवेदनशील बना दिया।

खतरनाक है खसरा

खसरा बेहद संक्रामक बीमारी है और खतरनाक भी, जो वायरस से फैलती है। इस बीमारी के लक्षणों में बुखार, खांसी, सर्दी-जुकाम तथा पूरे शरीर पर लाल चकत्ते दिखना शामिल है। सही इलाज नहीं होने पर निमोनिया, दस्त, मस्तिष्क की सूजन और मृत्यु तक हो सकती है।

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