
मॉस्को के सबसे बड़े तेल रिफाइनरी पर यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने रूस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सूत्रों के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि तबाही इतनी हुई है कि इस प्लांट को ठीक होने में कम से कम छह महीने लगेंगे यानी इस साल यह फिर से चलने वाला नहीं है।
इससे रूस में पेट्रोल और डीजल की कमी और गहरा गई है। देश के कई इलाकों में पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं और कीमतें भी बढ़ गई हैं।
मॉस्को के दक्षिणी इलाके में स्थित यह रिफाइनरी राजधानी और आसपास के इलाकों को सबसे ज्यादा पेट्रोल और डीजल देती थी। इस महीने दो बार ड्रोन हमलों में इसे भारी नुकसान पहुंचा है। अब प्लांट पूरी तरह बंद पड़ा है।
गजप्रोम नेफ्ट कंपनी, जो इसे चलाती है, उसने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। एक उद्योग सूत्र ने बताया कि मरम्मत में कम से कम आधा साल लग जाएगा। इस बीच रूस को ईंधन की कमी से जूझना पड़ रहा है।
यूक्रेन अब लंबी दूरी के ड्रोन से रूस की तेल सुविधाओं पर लगातार हमले कर रहा है। इन हमलों से रूस की कुल रिफाइनरी क्षमता का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो चुका है। नतीजा यह कि पूरे देश में, जो 11 टाइम जोन में फैला है, ईंधन की किल्लत महसूस की जा रही है।
मॉस्को रिफाइनरी 2024 में 1.16 करोड़ टन तेल प्रोसेस करती थी। इसमें से करीब 29 लाख टन पेट्रोल और 32 लाख टन डीजल बनता था। इतनी बड़ी क्षमता के बंद होने से रूस की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।
ईंधन संकट से निपटने के लिए रूस के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर अलेक्जेंडर नोवाक ने मंगलवार को कहा कि डीजल का निर्यात रोकने पर विचार किया जा रहा है।
वेदोमोस्ती अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, खासकर क्रीमिया में पेट्रोल की बिक्री बंद हो गई है, वहां ईंधन आयात करने की भी तैयारी चल रही है।
उधर, यूक्रेन की तरफ से रूसी ऊर्जा केंद्रों पर हमले तेज हुए हैं, तो रूस भी यूक्रेन के शहरों में मिसाइल हमले कर रहा है। लेकिन इन हमलों का सबसे ज्यादा असर रूस के आम नागरिकों और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। पेट्रोल पंपों पर कतारें, महंगाई और ईंधन की कमी अब रूस की बड़ी समस्या बन गई है।