
Nepal Flood Rescue: नेपाल में तबाही का मंजर सभी ने देखा। अब तक ऑफिशियली 600 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। मौत का आंकड़ा और भी बढ़ेगा। यहां बाढ़ ने हालात बिगाड़ दिए हैं। कई इलाकों में सड़कें टूट गई हैं। भूस्खलन से रास्ते बंद हैं। कई लोग अब भी फंसे हुए हैं। इसी बीच राहत अभियान से राहत देने वाली खबर आई है। नेपाल के रसुवा जिले में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से चार भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।
विदेश मंत्रालय यानी MEA ने शनिवार शाम इसकी जानकारी दी। बचाए गए भारतीयों के जल्द काठमांडू पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, नेपाल में अभी भी बड़ी संख्या में भारतीयों और पर्यटकों से संपर्क नहीं हो पाया है। ऐसे में रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।
रसुवा स्थित त्रिशूली-3 ‘ए’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। इसी दौरान चार भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इनकी पहचान रिपु कुमार, चनेश्वर नरजरी, कृपा शंकर और मोहम्मद मिनहाजुद्दीन के तौर पर हुई है।
नेपाली सुरक्षा बल पिछले दो दिनों से सुरंग के प्रवेश द्वार से मलबा हटाने में जुटे हैं। इस अभियान में नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के 82 जवान शामिल हैं। भारत ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन में तकनीकी मदद बढ़ाई है। भारत की विशेष तकनीकी टीम काठमांडू पहुंच चुकी है। टीम ने प्रभावित क्षेत्र में काम शुरू कर दिया है। उपकरणों से लैस एक विशेष टनल रेस्क्यू टीम भी नेपाल भेजी जा रही है।
विदेश मंत्रालय के 29 अगस्त शाम 5 बजे तक के अपडेट के मुताबिक, नेपाल में 88 भारतीय नागरिकों को बचाया जा चुका था। वहीं 287 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी थी।
MEA ने यह भी बताया कि शनिवार को 120 भारतीय नागरिक चीन से नेपाल में दाखिल हुए। भारत सरकार हालात पर लगातार नजर रख रही है। प्रभावित लोगों और उनके परिवारों की मदद के लिए 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। भारत से छह फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी नेपाल पहुंचने वाली है। यह टीम बरामद शवों की पहचान में नेपाली अधिकारियों की मदद करेगी।
नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर अलग अपडेट जारी किया। उसके मुताबिक, 29 अगस्त को दोपहर 1:30 बजे तक कुल 184 पर्यटकों को सुरक्षित बचाया गया था। इनमें 114 भारतीय शामिल थे। चीन के 27 और दक्षिण कोरिया के 20 नागरिक भी बचाए गए।
बोर्ड के अनुसार, तीन पर्यटक अधिकारियों के संपर्क में थे, जबकि 420 पर्यटकों से संपर्क नहीं हो पाया था। 26 अगस्त को रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और गोरखा जिलों में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में भयानक बाढ़ आई थी। इसके बाद से बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चल रहा है।
काठमांडू-मुगलिंग सड़क मार्ग अब पूरी तरह चालू है। हालांकि, बाढ़ प्रभावित कुछ इलाकों में सड़कें अभी भी प्रभावित हैं। प्रशासन ने लोगों और पर्यटकों से स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।