विदेश

Nepal Flood: नेपाल में बाढ़ के बाद नया संकट! अस्पतालों में दवा खत्म, सब कुछ तबाह होने के बाद शुरू हुई लूटपाट

Nepal Flood Latest Update: बाढ़ के बाद नेपाल में लूटपाट शुरू हो गई है। नकाबपोशों ने डॉक्टरों को भगा दिया। जानें अस्पतालों की मौजूदा स्थिति क्या है?
2 min read
Aug 29, 2026
Nepal Flood Latest Update
नेपाल में बाढ़ से बुरा हाल। (फोटो- AI)

नेपाल में बाढ़ ने लोगों के घर छीन लिए, अब दवा और पानी की कमी ने जिंदगी और मुश्किल कर दी है। इस बीच, सब कुछ तबाह होने के नेपाल के कई इलाकों में लूट-मार शुरू हो गई है।

पुल टूटने के बाद पुलिस से स्थानीय लोगों का संपर्क टूट गया है। अस्पताल और आसपास सिर्फ सात-आठ पुलिसकर्मी हैं। शुक्रवार को चार-पांच नकाबपोश लोग मोटरसाइकिल पर आए और ऑपरेशन कर रहे डॉक्टरों को भगा दिया। दिनदहाड़े लूटपाट शुरू हो गई है। आसपास के घरों में भी चोरी हो रही है।

देश में कालाबाजारी बढ़ी

द काठमांडू पोस्ट ने स्थानीय लोगों के हवाले से बताया कि देश में कालाबाजारी बढ़ गई है, रोजमर्रा की चीजें मिलना मुश्किल हो गया है। उधर, पूल टूटने के बाद अस्पताल का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है।

मरीजों को ले जाने-लाने के लिए हेलीकॉप्टर पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जो हमेशा उपलब्ध नहीं होता। अस्पताल में जरूरी दवाएं कम पड़ गई हैं। रसोई गैस नहीं है। एंबुलेंस के लिए डीजल भी कम है। ऐसे में बाढ़ से बचे लोग अब दवा, पानी और सुरक्षा की दूसरी मुसीबत झेल रहे हैं। अगर जल्दी मदद नहीं पहुंची तो शिविरों में नई तबाही का खतरा बढ़ जाएगा।

बाढ़ से बचे लोगों ने बताई अपनी पीड़ा

त्रिशूली बाजार में रहने वाली रेखा देवी गोसाईं को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और थायरॉइड है। बाढ़ में उनका घर और चार दुकानें बह गईं। दवाइयां बचाने का समय ही नहीं मिला।

अब परिवार त्रिशूली अस्पताल के पास राहत शिविर में है, लेकिन अस्पताल में उनकी दवा उपलब्ध नहीं है। बेटा रघुबीर ने कहा- मां को रोज दवा लेनी पड़ती है, तीन दिन हो गए कोई दवा नहीं मिली।

प्रसव पीड़ा में फंसी महिला को हेलीकॉप्टर से पहुंचाया गया

रघुबीर की भाभी को शिविर में ही प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। त्रिशूली अस्पताल में प्रसव कराने की सुविधा नहीं थी। काठमांडू तक सड़क रास्ता बंद था। कई बार गुहार लगाने के बाद शनिवार सुबह उन्हें थपाथली के परोपकार मैटरनिटी अस्पताल हेलीकॉप्टर से पहुंचाया गया।

पुरानी बीमारियों वाले मरीज दवा के बिना तड़प रहे

कोलानी शिविर में कोपिला परियार अपनी 62 साल की मां की देखभाल कर रही हैं। मां को अस्थमा है। कोपिला ने कहा- दो-तीन दवाएं चाहिए, पूरी नहीं मिल पा रही। शिविर में पीने का पानी नहीं, बोतलबंद पानी खरीदने के पैसे नहीं। कपड़े भी नहीं बचे। कोलानी बाजार में कुछ खरीदने को भी नहीं। उनके 16 साल के भाई अविनाश और 43 साल की भाभी शांति अभी भी लापता हैं।

अस्पताल में काम करने वालों ने क्या कहा?

इस बीच, त्रिशूली अस्पताल के फार्मासिस्ट महेश्वर यादव ने बताया कि हाई ब्लड प्रेशर की आम दवाएं एटेनोलोल और लोसार्टन खत्म हो चुकी हैं। इंटरनेट न होने से बीमा योजना भी बंद है। अस्पताल के सूचना अधिकारी रिकेश राणा ने कहा कि शिविर में रहने वाले कई लोगों को डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और अस्थमा है, लेकिन दवा नहीं मिल रही।

पानी खत्म, बीमारी फैलने का खतरा बढ़ा

अस्पताल और आसपास के इलाकों को पानी त्रिशूली जलविद्युत परियोजना की नहर और तुपचे पाइपलाइन से मिलता था। दोनों बह गए। अब लोग जो पानी मिलता है वही इस्तेमाल कर रहे हैं। बाघटार इलाके में तीन शिविर बने हैं।

भैरुंग माध्यमिक विद्यालय, कवर हॉल और बेथन एकेडमी में करीब एक हजार लोग ठहरे हैं। गर्भवती महिलाएं, नई माताएं और बीमार लोग भी हैं। साफ पानी और शौचालय की कमी है। गंदे पानी का निकास भी ठीक नहीं।

त्रिशूली अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट राजेंद्र लामा ने कहा- इतने लोग एक जगह रहने से बीमारी फैलने का खतरा है। साफ पानी और अच्छे शौचालय न होने से महामारी भी आ सकती है।

Updated on:
29 Aug 2026 07:00 pm
Published on:
29 Aug 2026 07:00 pm