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नेपाल में बाढ़ की भयावह तस्वीर! मुर्दाघर फुल, खाली इमारतों में रखे जा रहे शव, ड्राई आइस से संरक्षण

नेपाल में भयावह बाढ़ के बाद मुर्दाघर शवों से भर गए हैं। प्रशासन खाली इमारतों, ड्राई आइस और QR कोड तकनीक की मदद से शवों के संरक्षण और पहचान में जुटा है।
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Aug 28, 2026
Nepal Disaster
नेपाल में बाढ़ के बाद शवों का अंबार, खाली इमारतों को बनाया अस्थायी मुर्दाघर

Temporary Morgue Nepal: नेपाल में भोटकोशी और त्रिशूली नदी में आई भयावह बाढ़ के बाद स्थिति बेहद गंभीर हो गई है, जहां मुर्दाघर (Morgues) पूरी तरह भर जाने के कारण अधिकारी शवों के प्रबंधन के इंतजाम में जुटे हुए हैं। इस संकट से निपटने के लिए प्रशासन ने खाली पड़ी इमारतों और ड्राई आइस का उपयोग शुरू किया है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि रसुवा और नुवाकोट में बहे शव नदियों के तेज बहाव में 100 किलोमीटर दूर चितवन और अन्य निचले जिलों में मिल रहे हैं, जिससे वहां के स्थानीय अस्पताल कम पड़ गए हैं।

खाली इमारतों को बनाया अस्थायी मुर्दाघर

चितवन जिले के भरतपुर महानगरपालिका में 'इंडस्ट्रियल एंटरप्राइज डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट' की एक खाली पड़ी इमारत को अस्थायी शवगृह केंद्र में बदल दिया गया है। चितवन के स्थानीय मुर्दाघरों में केवल 30 से 50 शवों की जगह है, जबकि इस नई खाली इमारत में लगभग 250 से 500 शवों को रखने की व्यवस्था की जा रही है।

ड्राई आइस और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल

शवों को जल्द खराब होने से बचाने के लिए इन अस्थायी केंद्रों के कमरों में बड़े एयर कंडीशनर लगाए जा रहे हैं। शवों के सड़ने की प्रक्रिया को धीमा करने के लिए अधिकारी बड़े पैमाने पर ड्राई आइस (Dry Ice) और माइनस डिग्री सेल्सियस तापमान वाले स्पेशल कूलिंग हॉल का सहारा ले रहे हैं।

पहचान के लिए QR कोड तकनीक

नेपाल पुलिस ने उन अज्ञात शवों की एक विस्तृत सूची तैयार की है जिनके चेहरे और शारीरिक विवरण उपलब्ध हैं। पुलिस ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर एक QR कोड जारी किया है। बाढ़ प्रभावित परिवारों के लोग इस QR कोड को स्कैन करके अपने लापता रिश्तेदारों की तस्वीरें देख सकते हैं और पहचान कर सकते हैं।

अब तक 469 मौतें, 1400 से ज्यादा लापता

यह तबाही चीन-तिब्बत सीमा के पास एक ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव के कारण अचानक आई फ्लैश फ्लड होने की जानकारी सामने आई है। इस आपदा में 469 लोगों की मौत हो गई है और 1,400 से ज्यादा लोग लापता हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि रसुवा और नुवाकोट में बहे शव नदियों के तेज बहाव में 100 किलोमीटर दूर चितवन और अन्य निचले जिलों में मिल रहे हैं, जिससे वहां के स्थानीय अस्पताल कम पड़ गए हैं।

Updated on:
28 Aug 2026 05:53 pm
Published on:
28 Aug 2026 05:52 pm