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Nepal Floods: नेपाल ने बचाव अभियान के लिए क्यों ठुकराई विदेशी मदद? वजह सामने आई, दक्षिण कोरिया ने भी जारी किया बड़ा बयान

नेपाल में भीषण बाढ़ से करीब 500 लोगों की मौत और सैकड़ों के लापता होने के बावजूद सरकार ने भारत, अमेरिका समेत कई देशों की विदेशी रेस्क्यू टीमों की मदद लेने से इनकार कर दिया है। इसकी वजह भी सामने आई है।
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भारत

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Mukul Kumar

Aug 28, 2026

Nepal Flood Situation

नेपाल में बाढ़ से बुरा हाल। (फोटो- IANS)

नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने तबाही का ऐसा मंजर दिखाया है कि कई इलाके पूरी तरह उजड़ गए हैं। करीब 500 लोगों की मौत की खबर है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। इसके बावजूद नेपाल सरकार ने फिलहाल दूसरे देशों की सर्च एंड रेस्क्यू टीमों की मदद लेने से इनकार कर दिया है।

भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया समेत कई देशों ने नेपाल को बचाव अभियान में मदद की पेशकश की थी। इनमें कुछ देशों के नागरिक भी बाढ़ के बाद से लापता बताए जा रहे हैं।

नेपाल ने मदद ठुकराते हुए क्या कहा?

नेपाल के विदेश मंत्रालय का कहना है कि देश की सुरक्षा एजेंसियां खुद राहत और बचाव अभियान चला रही हैं और फिलहाल उसे विदेशी टीमों की जरूरत नहीं है।

नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने कहा कि दूसरे देशों की तरफ से मदद की पेशकश करना स्वाभाविक है, लेकिन अभी नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां ही खोज और बचाव का काम कर रही हैं।

दक्षिण कोरिया अपने नागरिकों को लेकर चिंतित

दक्षिण कोरिया ने नेपाल के फैसले के बावजूद मदद के लिए बातचीत जारी रखने की बात कही है। दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल ने संकेत दिया है कि वह अभी विदेशी रेस्क्यू टीमों को बुलाने की योजना नहीं बना रहा है।

दक्षिण कोरिया ने कहा है कि वह नेपाल के साथ इस मुद्दे पर बातचीत जारी रखेगा। सियोल ने मानवीय सहायता के तौर पर अंतरराष्ट्रीय संगठनों के जरिए 10 लाख डॉलर देने का भी ऐलान किया है।

नेपाल में फंसे हैं दक्षिण कोरिया के नागरिक

नेपाल में काम कर रहे दक्षिण कोरियाई नागरिक भी इस आपदा में फंसे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले नौ दक्षिण कोरियाई नागरिक लापता हैं, जबकि 10 अन्य लोगों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है।

क्यों नेपाल ने ठुकराई मदद?

नेपाल के इस फैसले को लेकर अब कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र में नेपाल के पूर्व राजदूत दिनेश भट्टराई का मानना है कि विदेशी रेस्क्यू टीमों को अनुमति नहीं देने के पीछे रासुवा जिले की संवेदनशील भौगोलिक स्थिति भी एक वजह हो सकती है।

रासुवा चीन के तिब्बत क्षेत्र से सटा हुआ है। ऐसे में कुछ जानकारों का मानना है कि नेपाल सरकार ने इलाके की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए विदेशी टीमों को अनुमति नहीं देने का फैसला किया हो सकता है।

हालांकि नेपाल के विदेश मंत्रालय ने इस बात से साफ इनकार किया है। प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने कहा कि विदेशी टीमों को रोकने का चीन से जुड़ी किसी संवेदनशीलता से कोई लेना-देना नहीं है। उनका कहना है कि नेपाल की अपनी सुरक्षा और बचाव टीमें अभियान को संभाल रही हैं।

सैकड़ों लोग अब भी लापता

भीषण बाढ़ के बाद नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। कई इलाकों में मलबा हटाकर लापता लोगों की तलाश की जा रही है। सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों तक पहुंचना है जिनके इलाके बाढ़ और मलबे की चपेट में आ गए हैं।

बाढ़ ने सिर्फ जान-माल को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि कई बुनियादी ढांचों को भी प्रभावित किया है। हाइड्रोपावर परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने से स्थानीय स्तर पर बिजली और दूसरी जरूरी सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है।

विदेशी नागरिकों के लापता होने की खबरों के बीच कई देश अपने नागरिकों को लेकर नेपाल के संपर्क में हैं। फिलहाल नेपाल सरकार का रुख साफ है कि बचाव अभियान देश की अपनी एजेंसियां ही संभालेंगी।