
Nepal Flood Fake Video: नेपाल के रसुवा और नुवाकोत जिलों में भोटेकोशी बाढ़ के बाद सबसे दर्दनाक तस्वीर सोशल मीडिया पर दिखी। एक महिला रो-रोकर सरकार से गुहार लगा रही थी कि सुरंग में फंसे उसके पति को जल्दी बचाया जाए। लेकिन कमेंट्स में हमदर्दी की जगह ताने और गाली-गलौज छा गए।
कुछ ने कहा पति ने खुद नौकरी ली तो क्यों रो रही हो, कुछ ने उसे सरकार को दोष देने का आरोप लगाया। गम में डूबी महिला का दर्द ऑनलाइन तमाशा बन गया।
बुधवार सुबह बाढ़ ने बस्तियां बहा दीं। परिवार लापता रिश्तेदारों की तलाश में थे, राहत टीम सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश कर रही थी। लेकिन फेसबुक, टिकटॉक और एक्स पर नया विवाद शुरू हो गया।
एक वीडियो में पूर्व होम मिनिस्टर सुदन गुरुंग सुरंग के अंदर दिख रहे थे। कैप्शन में उनकी तारीफ हो रही थी। वीडियो वायरल हो गया। बाद में पता चला कि यह उत्तराखंड के एक बचाव अभियान का पुराना फुटेज था।
एक और क्लिप में भयानक बाढ़ का नजारा था। सात मिलियन से ज्यादा व्यूज, हजारों रीपॉस्ट। कैप्शन में लिखा था प्रकृति पागल हो गई है। जांच में यह भी 97 प्रतिशत एआई से बना निकला। ब्रिज टूटने वाला एक और वीडियो भी पूरी तरह नकली था। नेपाल फैक्ट चेक ने एक वीडियो को अलास्का के ग्लेशियर से जोड़ा। पहले और बाद की तस्वीरें भी फर्जी निकलीं।
आपदा के तुरंत बाद सही खबर देर से आती है। लोग खुद फोटो-वीडियो इकट्ठा करके शेयर करने लगते हैं। व्यूज और वायरल होने की होड़ में कई लोग बिना जांच के पोस्ट कर देते हैं।
सोशल मीडिया के एल्गोरिदम भी इसी तरह की सामग्री आगे बढ़ाते हैं। पुराने वीडियो को नया बताकर या एआई से नई क्लिप बनाकर डर फैलाना आसान हो गया है।
झूठी खबरें सिर्फ भ्रम नहीं फैलातीं। कोई बच चुका हो तो भी पुराना वीडियो देखकर लोग घबरा जाते हैं। राहत कर्मियों का ध्यान बंटता है। लापता परिवारों को बार-बार झूठी उम्मीद या नया डर सताता है।
इस बीच, नेपाल में प्रेस काउंसिल ने चार दिन में 72 अकाउंट्स को आपत्तिजनक कंटेंट हटाने को कहा है। स्पेशल पोर्टल पर 101 शिकायतें आईं। ज्यादातर व्यक्तिगत अकाउंट्स से खौफनाक दृश्य शेयर किए गए थे।
मुख्यधारा के मीडिया ने काफी हद तक संयम रखा। लेकिन आम यूजर्स के स्तर पर सहानुभूति की कमी साफ दिखी। असली पीड़ा को व्यंग्य या व्यूज का साधन बना दिया गया।