
काठमांडू। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने कई इलाकों में तबाही मचा दी। धाडिंग जिले के बैरेनी में भी बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा था। इसी बीच बागेश्वरी हायर सेकेंडरी स्कूल के शिक्षकों ने समय रहते खतरे को भांपकर करीब 400 छात्रों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया। शिक्षकों की इस तत्परता से बड़ा हादसा टल गया।
बिनिता रामटेल ने ANI को बताया कि 26 अगस्त को स्कूल पहुंची थीं। उन्होंने कक्षा में अपना बैग रखा ही था और सुबह की प्रार्थना सभा के लिए मैदान में जाने की तैयारी कर रही थीं। तभी शिक्षकों ने छात्रों को तुरंत स्कूल खाली कर ऊंचे स्थान की ओर जाने की चेतावनी दी। इसके बाद छात्र स्कूल से निकलकर भागते हुए ऊंचे स्थान पर पहुंच गए।
बैरेनी पृथ्वी हाईवे के किनारे बसा है। बाढ़ का पानी यहां बुधवार को पहुंचा और अपने साथ भारी मात्रा में गाद और रेत लेकर आया। नदी के स्तर से करीब दो मीटर तक ऊंची रेत और मलबे की परत जम गई। बाढ़ के करीब एक सप्ताह बाद जब बिनिता स्कूल पहुंचीं तो वह मैदान, जहां कभी सुबह की प्रार्थना सभा और खेल हुआ करते थे, रेत के समंदर में तब्दील हो चुका था। उनकी कक्षा भी कीचड़ और मलबे में दब गई थी।
स्कूल के अंदर अचानक निकासी के निशान अब भी साफ दिखाई दे रहे हैं। कई छात्रों के बैग डेस्क पर ही रह गए थे। बिनिता और उनकी सहेली प्रसंशा मगराती ने देखा कि कई छात्रों का सामान पानी से भीग चुका था। कुछ टिफिन बॉक्स में खाना तक रखा हुआ था। स्कूल की दीवारों पर बने कीचड़ के निशान बताते हैं कि बाढ़ का पानी कितनी ऊंचाई तक पहुंचा था। कुछ ही मिनटों में शिक्षकों ने छात्रों को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया, वरना स्कूल नदी के बेहद करीब होने के कारण बड़ी त्रासदी का गवाह बन सकता था।
स्कूल के विज्ञान शिक्षक दीपेंद्र वाग्ले के मुताबिक, छात्र पीटी या सुबह की सभा के लिए तैयार हो रहे थे। इसी दौरान एक शिक्षक को नुवाकोट से बाढ़ की जानकारी मिली। इसके बाद प्रधानाचार्य प्रकाश मल्ल ने स्कूल कार्यालय से छात्रों को तत्काल बाहर निकलने की घोषणा की। दीपेंद्र ने बताया कि घोषणा होते ही सभी छात्र स्कूल से बाहर निकल गए और सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए। शिक्षकों की तेजी के कारण करीब 400 छात्रों की जान बचाई जा सकी।
एक छात्र के पिता राजकुमार रिमाल ने बताया कि वह उस दिन खेत में काम कर रहे थे। तभी उनकी पत्नी ने फोन कर जानकारी दी कि नुवाकोट में बेत्रावती नदी में बाढ़ आ चुकी है और पानी तेजी से नीचे की ओर बढ़ रहा है। रिमाल ने बताया कि इलाके के दो स्कूल सीधे बाढ़ के खतरे की चपेट में थे। वह तुरंत स्कूल पहुंचे। वहां अफरा-तफरी का माहौल था और शिक्षक छात्रों को सुरक्षित स्थान की ओर ले जा रहे थे। उन्होंने भी शिक्षकों के साथ मिलकर छात्रों को ऊंचे स्थान पर पहुंचाने में मदद की।
बाढ़ के करीब एक सप्ताह बाद भी स्कूल परिसर में कीचड़ और गाद जमा है। मलबे से दुर्गंध आ रही है। ऐसे में स्कूल कब तक दोबारा शुरू हो पाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। UNICEF के अनुसार, 26 अगस्त की बाढ़ के बाद नेपाल में करीब 17 हजार बच्चों को मानवीय सहायता की जरूरत थी।