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बाढ़ में घर-बार सब बह गया, लेकिन मालिक के इंतजार में मलबे पर डटा रहा यह वफादार डॉग

Nepal Flood: त्रिशूली बाजार में आई भीषण बाढ़ के मलबे के बीच एक वफादार डॉग अपने लापता मालिक का इंतजार कर रहा है। जेसीबी के शोर और तबाही के बीच भी वह अपने पुराने घर के आंगन की जगह छोड़ने को तैयार नहीं है। पढ़ें पूरी खबर...
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भारत

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Pratiksha Gupta

Sep 01, 2026

Trishuli Bazaar, Nepal Flood, Loyal Dog

बाढ़ में घर उजड़ने के बाद भी उसी जगह मालिकों का इंतजार करता डॉग (फोटो सोर्स- Gemini)

Nepal Flash Floods: कहते हैं कि इंसानी रिश्ते भले ही वक्त और तबाही के साथ टूट जाएं, लेकिन एक बेजुबान की वफादारी कभी कम नहीं होती। ऐसा ही एक भावुक कर देने वाला नजारा त्रिशूली बाजार में देखने को मिला, जहां हाल ही में नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने हंसते-खेलते परिवारों और उनके आशियानों को पल भर में तबाही के मलबे में बदल दिया। सब कुछ खत्म हो गया, लेकिन तबाही के इस मंजर के बीच एक डॉग अपने पुराने घर के आंगन की चौखट पर पिछले एक हफ्ते से बैठा है। उसे इंतजार है तो बस अपने लापता मालिक का।

जेसीबी का शोर भी उसे डरा नहीं पाया

बाढ़ के पानी ने देखते ही देखते चार मकानों को पूरी तरह से बहा दिया। अब वहां सिर्फ कीचड़, पत्थर और मलबा ही बचा है। जगह-जगह आधा दर्जन से अधिक जेसीबी और बुलडोजर मलबा हटाने में लगे हैं। मलबे के बीच गूंजती भारी मशीनों की आवाज भी इस वफादार डॉग को वहां से हिला नहीं सकी।

उसके गले में अभी भी कॉलर बंधा हुआ है। मशीनें जब उसके बिल्कुल पास से गुजरती हैं, तब भी वह घबराता नहीं है। वह किसी अनजान इंसान को देखकर न तो पूंछ हिलाता है और न ही कोई हलचल करता है। उसकी नजरें बस उसी जगह पर टिकी हैं, जो कभी उसके घर का मुख्य दरवाजा हुआ करती थी।

बिस्किट दिए, प्यार से बुलाया… पर वह टस से मस नहीं हुआ

स्वयंसेवी राहतकर्मी बिक्रम थापा ने TOI को बताया कि शुरुआत में उसे बिस्किट दिए और प्यार से बुलाकर वहां से हटाने की कोशिश की, लेकिन उसने किसी की तरफ देखा तक नहीं। वह अपने घर के आंगन की सीमा से बाहर जाने को तैयार ही नहीं है। जब बचाव दल को लगा कि वह वहां से नहीं हटेगा, तो उन्होंने उसके पास ही सूखा खाना और पानी रखना शुरू कर दिया। जब आसपास सन्नाटा होता है, तब वह खाने में से सिर्फ एक-दो निवाले ही खाता है।

बेजुबान के दर्द ने पिघलाया पीड़ितों का दिल

स्थानीय निवासियों का कहना है कि बाढ़ आते ही बाकी जानवर जान बचाकर पहाड़ियों की ओर भाग गए थे, लेकिन यह बेजुबान वहीं डटा रहा। किसी को यह नहीं मालूम कि वह बह चुके चार मकानों में से किस परिवार का पालतू था, लेकिन उसकी ये जिद बता रही है कि यही उसका आशियाना था।

खुद अपना सब कुछ गंवा चुके बेघर लोग भी अब इस वफादार की पीड़ा समझ रहे हैं और उसकी देखभाल में लगे हैं। एक प्रत्यक्षदर्शी ने भावुक होकर कहा कि हमने अपने घर खोए हैं, लेकिन हम इस तबाही की वजह समझते हैं। यह मासूम नहीं समझ पा रहा कि उसके अपने कहां गायब हो गए… इसे तो बस इतना पता है कि जब तक मालिक लौट नहीं आते, उसे यह चौखट नहीं छोड़नी है।