
नेपाल बाढ़ में रोते-बिलखते मलबे में अपनों को ढूंढ रहे लोग (फोटो सोर्स- IANS)
Nepal Flood Update: नेपाल में कुदरत का एक ऐसा कहर देखने को मिला है जिसने हंसते-खेलते गांवों को मिनटों में मलबे के ढेर में बदल दिया। त्रिशूली नदी में आई अचानक बाढ़ ने ऐसी तबाही मचाई कि न सड़कें बचीं, न मकान और न ही लोगों के आशियाने। नदी के उफान में पूरा का पूरा गांव समा गया है। जो लोग जिंदा बचे हैं, वे अब बदहवास होकर कीचड़ और मलबे के बीच अपने परिजनों को तलाश रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में तबाही का ऐसा खौफनाक मंजर पहले कभी नहीं देखा।
काठमांडू में काम करने वाले एक स्थानीय पत्रकार अर्जुन पौडेल ने बताया कि जब वे दफ्तर जा रहे थे, तभी उनकी पत्नी का फोन आया। फोन पर पत्नी की कांपती आवाज ने उन्हें सन्न कर दिया। उसने कहा कि त्रिशूली नदी में भयंकर बाढ़ आ गई है। सोले बाजार और बेत्रावती गांव पूरी तरह डूब चुके हैं, वहां कुछ भी नहीं बचा। लोग जान बचाने के लिए सड़कों पर भाग रहे हैं।
अर्जुन के लिए इस बात पर यकीन करना नामुमकिन था, क्योंकि सोले वही गांव था जहां उनका बचपन बीता था। यह इलाका नदी के जलस्तर से लगभग 100 मीटर ऊपर बसा हुआ था। इतिहास में कभी इस ऊंचाई तक पानी नहीं पहुंचा था। लेकिन इस बार कुदरत के कहर ने सब कुछ खत्म कर दिया।
बाढ़ के बाद हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि नेटवर्क पूरी तरह ठप हो गए हैं। अर्जुन के एक साथी निरंजन ने रोते हुए बताया कि माता-पिता, चाचा और बहन सब बाढ़ में बह गए हैं। गांव में कुछ भी नहीं बचा, सब खत्म हो गया। किसी का भी फोन नहीं लग रहा है।
बेत्रावती बाजार, जो कभी अपनी सांस्कृतिक पहचान, ऐतिहासिक संधियों और प्रसिद्ध मंदिरों के लिए जाना जाता था, आज वहां सिर्फ सन्नाटा और मलबा है। स्थानीय लोगों के अनुसार बेत्रावती के करीब 90 फीसदी घर और गाड़ियां बह चुकी हैं। कई लोगों ने ऊंची पहाड़ियों पर चढ़कर अपनी जान बचाई, लेकिन वे अपनी आंखों के सामने अपने अपनों को बहते देखने के अलावा कुछ नहीं कर सके।
तबाही केवल लोगों के घरों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। त्रिशूली नदी पर बने नए और पुराने दोनों मजबूत पक्के पुल पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं, यहां तक कि पैदल पार करने वाले झूला पुल भी नहीं बचे।
इस तबाही के कारण बागटार स्थित जिला अस्पताल तक पहुंचने वाले सभी रास्ते बंद हो चुके हैं, जिससे स्थिति इतनी नाजुक हो गई है कि गंभीर रूप से घायल और बीमार मरीजों को अस्पताल पहुंचाना लगभग असंभव हो गया है। इसके अलावा, त्रिशूली जलविद्युत स्टेशन के क्षतिग्रस्त हो जाने से कई बड़े इलाकों में बिजली गुल है और अंधेरा छाया हुआ है। इस भयंकर जलप्रलय के बाद रसुवा जिला और आसपास के दर्जनों दूरदराज के गांवों का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट चुका है।
राहत और बचाव कार्य के लिए सेना के हेलीकॉप्टर की मदद ली जा रही है, लेकिन टूटी सड़कों और कटे हुए संपर्कों की वजह से मदद पहुंचने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। खेतों की फसलें, घरों में रखा अनाज और रोजगार के साधन सब पानी में बह गए हैं।
तबाही के इस मंजर को देखने के बाद अब हर ग्रामीण की जुबान पर बस एक ही दर्दनाक सवाल है, 'क्या हमारा गांव कभी पहले जैसा बन पाएगा?'
Updated on:
30 Aug 2026 01:57 pm
Published on:
30 Aug 2026 01:57 pm
