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कच्चे तेल के संकट के बीच एकजुट हुए 4 बड़े देश, अमेरिका में होगी क्वाड की खास बैठक

Quad Fuel Security Forum: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट के बीच क्वाड देश अमेरिका के ह्यूस्टन में पहली 'फ्यूल सिक्योरिटी' बैठक करने जा रहे हैं। जानें भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व पर क्या होगा बड़ा फैसला।
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भारत

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Pratiksha Gupta

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Updated: 1 Sep 2026, 10:50 AM IST

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G20 के दौरान पहली बार चारों देशों के ऊर्जा मंत्री करेंगे बैठक (फोटो सोर्स- ANI)

Quad Fuel Security Forum: दुनिया भर में गहराते ऊर्जा संकट और मिडिल ईस्ट में जारी जंग के माहौल के बीच क्वाड समूह ने एक रणनीतिक कदम उठाया है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के ऊर्जा मंत्री पहली बार एक साथ बैठक करने जा रहे हैं। सितंबर के दूसरे हफ्ते में अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में होने वाली G20 ऊर्जा मंत्रिस्तरीय बैठक से इतर यह मुलाकात होगी। इस बैठक का सबसे बड़ा मकसद हिंद-प्रशांत क्षेत्र और चारों सदस्य देशों के लिए ईंधन की सुरक्षा को पुख्ता बनाना है।

संकट के समय क्वाड देशों का बड़ा कदम

मिडिल ईस्ट के हालातों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल की आपूर्ति में आ रही रुकावटों को देखते हुए क्वाड देशों ने हाथ मिलाने का फैसला किया है। मई में नई दिल्ली में हुई विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान ही 'फ्यूल सिक्योरिटी फोरम' के गठन की योजना बनी थी। अब ह्यूस्टन में होने वाली बैठक इस फोरम की पहली आधिकारिक बातचीत होगी, जिसमें भारत का प्रतिनिधित्व केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर करने वाले हैं।

भारत-जापान को मिल सकती है लीज पर जगह

इस पूरी बैठक की सबसे बड़ी नजर भारत और अमेरिका के बीच होने वाले संभावित तेल समझौते पर रहेगी। अमेरिका अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में भारत और जापान को जगह लीज पर देने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। इसके साथ ही, भारत को अपने खुद के घरेलू तेल भंडारों की क्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक अमेरिकी तकनीकी सहायता भी मिल सकती है।

हिंद-प्रशांत और दक्षिण एशिया की ऊर्जा सुरक्षा पर जोर

क्वाड का यह फोरम सिर्फ अपने चार सदस्य देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए राहत की बात है। इसके तहत भारत अपनी ऊर्जा कूटनीति के जरिए दक्षिण एशिया के पड़ोसी देशों की जरूरतों को पूरा करने में मुख्य भूमिका निभाएगा, वहीं जापान और ऑस्ट्रेलिया दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में बिजली व ईंधन आपूर्ति की स्थिरता बनाए रखने का जिम्मा संभालेंगे। वैश्विक बाजार में जब तेल की उपलब्धता सीमित और दाम अस्थिर हो रहे हैं, तब क्वाड देशों की यह संयुक्त रणनीति भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए एक बहुत बड़ी राहत साबित हो सकती है।