
Bidur flood Nepal: मजदूर बिबेक कुमाल 26 अगस्त को रोजाना की तरह घर से मजदूरी करने के लिए निकले। वह बिदुर इलाके में नए बने घर के बाहर गड्ढा खोदने का काम कर रहे थे। बिदुर में मौसम साफ था, लेकिन तभी नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवा इलाके से सैलाब बहते हुए नीचे बिदुर इलाके में दाखिल हुआ। देखते ही देखते पूरा इलाके बाढ़ की चपेट में आ गया और लोगों को बचने तक का मौका नहीं मिला।
बिबेक कुमाल ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए कहा कि सुबह काम के दौरान अचानक तेज सीटी जैसी आवाज सुनाई दी। ऊपर पहाड़ी की तरफ देखा तो कुछ लोग सीटी बजाकर तुरंत जगह छोड़ने के लिए चिल्ला रहे थे, लेकिन जब तक उस जगह से निकल पाता तब तक बाढ़ की चपेट में आ गया। इस दौरान कई साथी वहां से निकलने में सफल रहे।
बिबेक ने कहा, 'जब मैं भागने की कोशिश कर रहा था, तभी पानी की विशाल लहर इतनी तेजी से नीचे आई जैसे मानो धरती भूंकप के झटके से जोरदार तरीके हिली हो। तेज बहाव में मैं कीचर, पत्थरों और मलबे में काफी दूर तक बहता हुआ चला गया। किस्मत से मैं एक आम के पेड़ से अटक गया। गर वहां आम का पेड़ नहीं होता तो मैं बहकर मर गया होता। इस दौरान मैंने उस घर को मलबे में तब्दील होते हुए देखा जिसके बगल में मैं गड्ढा खोद रहा था। सबकुछ थम जाने के घंटे भर बाद रेस्क्यू की टीम पहुंची। उन्होंने मुझे बाहर निकाला और काठमांडू के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया।' मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ के पानी और बड़े पत्थर की चपेट में आने से उसके दाहिने पैर में गंभीर चोट आई। उसका अपना घर, जो किसी अन्य इलाके में स्थित है, इस आपदा से सुरक्षित बच गया।
वहीं, अस्पताल में भर्ती 11 वर्षीय रिहाना लामिछाने भी इस आपदा में बाल-बाल बच गई। रिहाना ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि मैं स्कूल में थी। ऊपरी इलाके में बाढ़ आने की वजह से स्कूल बंद कर दिया गया था। सभी को फौरन अपने घर जाने को कहा गया था। जब मैं नदी पार कर रही थी। उसी दौरान पानी अचानक बढ़ गया। तेज बहाव में बहने के कारण सीने और पैर में चोटें आई हैं। मैं बच गई, लेकिन मेरे दोस्त कहां हैं। इसके बारे में कुछ पता नहीं है।
रिहाना की मां रीता लामिछाने ने बताया कि एक मित्र का फोन मिलने के बाद वह अपनी बेटी को खोजने के लिए दौड़ीं। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि मेरी बेटी के साथ कोई गंभीर घटना नहीं हुई। उसे सुरक्षित देखकर मुझे राहत मिली है।