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Nepal Flash Flood: एक झटके में गायब हुई 5 मंजिला इमारत! नेपाल बाढ़ में कैलाश यात्रियों पर टूटा कहर, भागने का मौका भी नहीं मिला

Kailash Mansarovar Pilgrims: नेपाल के रसुवा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के अहम मार्ग को झकझोर दिया है। करीब 500 पर्यटकों के लापता होने की खबर ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। इनमें बड़ी संख्या में भारतीय और अन्य देशों से आए तीर्थयात्री शामिल हैं।
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भारत

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Manoj Vashisth

Aug 27, 2026

Nepal Flash Flood

Nepal Flash Flood :लहरों में बह गया बॉर्डर सेंटर, कैलाश यात्रियों की बढ़ी चिंता (फोटो सोर्स:@Sachingupta)

Kailash Mansarovar Yatra: नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण बाढ़ ने सिर्फ गांवों और सड़कों को नहीं बहाया, बल्कि कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े सैकड़ों लोगों की जिंदगी भी अचानक संकट में डाल दी है। सोशल मीडिया X पर सामने आया वीडियो उस भयावह मंजर की झलक दिखाता है, जिसमें कई मंजिला इमारत देखते ही देखते पानी और मलबे की लहरों में समा जाती है। यह वही इलाका है जहां कैलाश जाने वाले यात्रियों की आवाजाही होती है। अब सैकड़ों पर्यटकों से संपर्क टूटने के बाद चिंता गहराती जा रही है।

जिस इमारत को लहरों ने निगल लिया, वह थी अहम इमिग्रेशन सेंटर

वायरल वीडियो में दिखाई दे रही चार से पांच मंजिला इमारत कोई सामान्य भवन नहीं थी। यह नेपाल-चीन सीमा से जुड़े प्रमुख इमिग्रेशन क्षेत्र में स्थित केंद्र था, जहां सीमा पार करने वाले यात्रियों की औपचारिकताएं पूरी होती थीं। इसी क्षेत्र से कैलाश मानसरोवर जाने वाले बड़ी संख्या में यात्री तिब्बत की ओर आगे बढ़ते हैं।

बाढ़ के दौरान इस इलाके में बड़ी संख्या में यात्री मौजूद थे। इसी वजह से इमिग्रेशन सेंटर और आसपास के क्षेत्र में मौजूद लोगों की सुरक्षा को लेकर सबसे ज्यादा चिंता पैदा हुई है।

करीब 500 पर्यटक लापता, आंकड़ों की हो रही जांच

नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार शुरुआती रिपोर्टों में लगभग 500 लोगों के लापता या संपर्क से बाहर होने की जानकारी सामने आई है। इनमें करीब 403 पर्यटक बताए गए हैं, जिनमें 341 विदेशी नागरिक और 62 नेपाली नागरिक शामिल हैं। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि संचार व्यवस्था और सड़क संपर्क टूटने के कारण शुरुआती आंकड़े लगातार बदल सकते हैं। किसी व्यक्ति का 'लापता' सूची में होना यह जरूरी नहीं कि वह बाढ़ में बह गया हो।

इसीलिए प्रशासन ट्रैवल एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा बलों और पर्यटक पुलिस के रिकॉर्ड मिलाकर वास्तविक स्थिति पता करने में जुटा है।

लाश यात्रा से जुड़े कई यात्री भी फंसे

इस आपदा का सबसे गंभीर पहलू यह है कि प्रभावित लोगों में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले तीर्थयात्री भी शामिल हैं। शुरुआती सूचनाओं के मुताबिक बड़ी संख्या में यात्री नेपाल के रास्ते तिब्बत जाने के लिए सीमा क्षेत्र में पहुंचे थे।

एक समूह के मामले में 77 तीर्थयात्रियों के इमिग्रेशन सेंटर के आसपास होने की जानकारी सामने आई है। ईशा फाउंडेशन से जुड़े इस समूह के बारे में सद्गुरु ने बताया कि बाढ़ के समय यात्री वापसी के दौरान इमिग्रेशन केंद्र पर थे और घटना के बाद उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

133 भारतीयों समेत कई देशों के नागरिकों की तलाश

बाढ़ की चपेट में आने वालों में भारतीय नागरिकों की संख्या भी काफी है। ताजा रिपोर्टों में 133 भारतीयों के लापता होने की बात सामने आई है। इनके अलावा एनआरआई, ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अन्य देशों के नागरिकों के भी प्रभावित होने की जानकारी है।

यही वजह है कि यह आपदा अब केवल नेपाल की स्थानीय त्रासदी नहीं रह गई है। अलग-अलग देशों के दूतावास और सरकारें अपने नागरिकों की स्थिति पता करने में जुटी हैं।

कैसे आया इतना बड़ा सैलाब?

नेपाल-तिब्बत सीमा के हिमालयी इलाके में अचानक आई बाढ़ ने बेहद कम समय में भारी तबाही मचा दी। भोटे कोशी नदी और आसपास के जलप्रवाहों में अचानक पानी बढ़ा। प्रारंभिक आकलनों में हिमखंड और चट्टानों के बड़े पैमाने पर खिसकने से नदी का रास्ता बाधित होने और उसके बाद अचानक पानी टूट पड़ने जैसी संभावनाएं सामने आई हैं। घटना के सटीक कारण की जांच अभी जारी है।

विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयी क्षेत्र में ऐसी घटनाओं का खतरा बेहद गंभीर है, क्योंकि ग्लेशियर, बर्फ, चट्टान और भारी बारिश से जुड़ी घटनाएं अचानक बड़े पैमाने पर बाढ़ पैदा कर सकती हैं।

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर क्या असर पड़ा?

नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर जाने वाला मार्ग फिलहाल बुरी तरह प्रभावित है। यात्रा संचालकों ने सुरक्षा को देखते हुए अगले कुछ समय के लिए यात्राओं को रोक दिया है। हालांकि भारत सरकार द्वारा आयोजित कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिपुलेख और नाथू ला मार्ग इससे अलग हैं और उन पर इस आपदा का सीधा असर नहीं पड़ा है।

नेपाल के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने वैकल्पिक सीमा मार्गों को खोलने और यात्रियों के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को आसान बनाने की मांग भी उठाई है।

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, परिवारों की निगाहें हर अपडेट पर

नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाली सेना प्रभावित क्षेत्रों में तलाश और बचाव अभियान चला रहे हैं। कई इलाकों में हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है, लेकिन मलबा, टूटी सड़कें, खराब मौसम और संचार व्यवस्था का ठप होना अभियान को बेहद चुनौतीपूर्ण बना रहा है।

इस बीच भारतीय अधिकारी भी नेपाल और चीन के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं। प्रभावित भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने और जरूरत पड़ने पर सहायता पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।