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तिब्बत में भूकंप या फटा ग्लेशियर? नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने मचाई तबाही, भारत-चीन समेत दुनिया आई मदद को आगे

Nepal Flood: नेपाल की भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से भारी तबाही हुई है। आपदा की वजह तलाशने में वैज्ञानिक जुटे हैं, वहीं भारत, चीन, अमेरिका और विश्व बैंक ने मदद का हाथ बढ़ाया है।
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भारत

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Pratiksha Gupta

Aug 27, 2026

Tibet Earthquake, Nepal China Border News

नेपाल में बाढ़ से हुई भारी तबाही का मंजर / फोटो सोर्स- X(@SaffronSunita)

Bhotekoshi River Flood: नेपाल की शांत वादियों में अचानक आई खौफनाक बाढ़ ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी, त्रिशूली और ल्हेंडे नदी के आसपास के इलाके पल भर में मलबे के ढेर में बदल गए। इस भयावह प्राकृतिक आपदा ने न केवल दर्जनों गांवों और पुलों को तबाह कर दिया, बल्कि अरबों रुपये के सरकारी व निजी बुनियादी ढांचे का भी भारी नुकसान हुआ है। साल 2015 के भीषण भूकंप के बाद नेपाल में इसे सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा माना जा रहा है। इस मुश्किल वक्त में भारत, चीन, अमेरिका और विश्व बैंक ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया है।

आपदा की असली वजह क्या? 3 मिनट में बदला मंजर

नेपाल सरकार और वैज्ञानिक इस बात की जांच में लगे हैं कि आखिर इतना बड़ा जलप्रलय आया कैसे। विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार, बुधवार सुबह 8:37 बजे तिब्बती इलाके में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इसका केंद्र गोसाईकुंड से करीब 47 किलोमीटर दूर उत्तर में था। ठीक 3 मिनट बाद यानी 8:40 बजे नदी में अचानक विकराल बाढ़ आ गई।
शुरुआती सैटेलाइट तस्वीरों से अंदाजा लगाया जा रहा है कि सीमा के पास पहाड़ों पर ग्लेशियर और चट्टान खिसकने से मलबे से भरी झील फूट पड़ी, जिससे ल्हेंडे और भोटेकोशी नदियां उफान पर आ गई। हालांकि, खराब मौसम और ठप्प पड़े संचार नेटवर्क की वजह से नेपाली और चीनी अधिकारी अब तक इसके सटीक कारणों की पुष्टि नहीं कर पाए हैं।

सीमा पर नेटवर्क ठप्प, पूर्व चेतावनी प्रणाली की खुली पोल

बाढ़ के बाद प्रभावित सीमावर्ती इलाकों में मोबाइल टावर, सड़कें और इंटरनेट पूरी तरह ठप्प हो चुके हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मियों से भी दोनों देशों का संपर्क कटा हुआ है।
इस तबाही ने एक बार फिर पूर्व चेतावनी (अर्ली वॉर्निंग) सिस्टम की कमी को उजागर कर दिया है। पिछले साल जुलाई में भी इसी तरह रसुवागढ़ी सीमा के ऊपर ग्लेशियर झील फटने से 11 लोगों की जान चली गई थी और प्रसिद्ध 'मितेरी पुल' बह गया था। तब दोनों देशों ने रियल टाइम डेटा शेयर करने पर सहमति जताई थी, लेकिन कोई पक्का समझौता न होने का नुकसान आज फिर बेकसूर लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

भारत ने सबसे पहले बढ़ाया हाथ, C-17 और C-130 विमान तैयार

तबाही की खबर मिलते ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात की। उन्होंने दुख जताया और हरसंभव मदद का भरोसा दिया। भारत ने काठमांडू के लिए दवाइयां, राहत सामग्री और मिट्टी हटाने वाली भारी मशीनें भेजने की तैयारी कर ली है। भारतीय वायुसेना के C-17 और C-130 विमान राहत दल के साथ जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

चीन, अमेरिका और विश्व बैंक भी मदद में जुटे

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने तुरंत राहत बचाव काम शुरू करने के आदेश दिए हैं। चीन ने नेपाल को सीधी नकद वित्तीय सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और अपने उपप्रधानमंत्री झांग गुओछिंग को आपदा वाली जगह पर भेजा है। दूसरी तरफ विश्व बैंक ने नेपाल में राहत और पुनर्निर्माण के काम के लिए करीब 25 अरब रुपये जुटाने का वादा किया है। अमेरिका ने भी नेपाली विदेश मंत्रालय से संपर्क कर हर तरह की तकनीकी व मानवीय सहायता देने की बात कही है। नेपाल सरकार ने कैबिनेट बैठक के बाद रसुवा, नुवाकोट और धादिंग के सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों को "संकटग्रस्त क्षेत्र" घोषित कर दिया है, ताकि देश-विदेश से आने वाली राहत सामग्री बिना किसी प्रशासनिक देरी के सीधे पीड़ितों तक पहुंच सकें।