
Nepal Flood: नेपाल में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में अब तक 987 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3,916 लोग लापता है। बाढ़ में किसी ने भाई-बहन को को दिया तो कोई अब भी अपने लापता परिजनों की तलाश में है। वहीं बाढ़ और भूस्खल के कारण सड़कें और पुल तबाह हो गए हैं,जिसकी वजह से नेपाल के कई इलाके अभी भी देश के बाकी हिस्सों से कटे हुए हैं। इन इलाकों में राहत और बचाव टीमें पहुंचने की कोशिश में जुटी हुई हैं।
बाढ़ में एक बच्चे ने पहाड़ी पर चढ़कर अपनी जान बचाई। दरअसल, रसुवा के खाल्टे गांव के 16 वर्षीय समीर तमांग जब स्कूल पहुंचे, तब तक भोटेकोशी नदी मलबे के साथ उफनती धारा में बदल चुकी थी।
समीर ने किसी तरह पास की पहाड़ी पर चढ़कर अपनी जान बचाई। लेकिन उनकी दो छोटी बहनें 13 वर्षीय प्रिया और 7 वर्षीय पारबती घर पर ही थीं। बाढ़ का पानी गांव में घुसने के बाद से दोनों लापता हैं।
द काठमांडू पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि समीर ने कहा कि मेरी सबसे छोटी बहन के हाथ में चोट लगी थी, इसलिए वह स्कूल नहीं जा सकी। मेरी बड़ी बहन उसकी देखभाल के लिए घर पर रुक गई थी। मुझे अब समझ नहीं आ रहा कि क्या करूं। मेरी बहनें मेरी सबसे करीबी दोस्त थीं और एक ही पल में बाढ़ उन्हें मुझसे दूर ले गई।
वहीं बाढ़ में समीर का घर भी बह गया। इसके अलावा उनके पिता भी किसी तरह बाढ़ में बच गए। हालांकि उनकी मां कुवैत में काम करती हैं।
नेपाल शिक्षा मंत्रालय के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, प्रभावित जिलों में 250 छात्र और शिक्षक अब भी लापता हैं। इनमें 230 छात्र शामिल हैं। इनमें से 213 छात्रों से संपर्क नहीं हो पाया है, जबकि 17 के बाढ़ में बह जाने की पुष्टि हुई है।
वहीं, लापता 19 शिक्षकों में से 10 के बाढ़ में बह जाने की पुष्टि की गई है। बाढ़ से 23 शैक्षणिक संस्थानों को भारी संरचनात्मक नुकसान पहुंचा है। इनमें नुवाकोट के आठ, रसुवा के सात और धादिंग के अन्य स्कूल शामिल हैं।
मंत्रालय के सूचना अधिकारी बीर बहादुर धामी ने बताया कि आंकड़े फ्लड-अफेक्टेड एजुकेशन नाम के व्हाट्सऐप ग्रुप, आपदा प्रबंधन टास्कफोर्स और फील्ड अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर जुटाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि राहत और बचाव दल अभी भी कीचड़ और मलबा हटाने में जुटे हैं। ऐसे में लोगों से दोबारा संपर्क स्थापित होने के साथ लापता और मृतकों की संख्या में लगातार बदलाव हो रहा है।