
Nepal custom duty rule: नेपाल की बालेन्द्र शाह (बालेन शाह) सरकार ने भारतीय सामानों पर टैक्स लगाने के फैसले को वापस ले लिया है। उनके इस फैसले का देश में काफी विरोध प्रदर्शन हो रहा था, जिसके चलते उन्हें अपने निर्णय पर पुनर्विचार को मजबूर होना पड़ा है।
नेपाल सरकार ने अप्रैल के मध्य में कस्टम नियम को सख्ती से लागू कर दिया था। इसके तहत भारत से लाए गए 100 नेपाली रुपए से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम ड्यूटी देना अनिवार्य था। लेकिन भारतीय सीमा से सटे नेपाली लोगों के भारी विरोध और समस्याओं को देखते हुए सरकार ने अब इस पर पीछे हटने का फैसला किया है।
नेपाल सरकार खुद माना है कि इन नियम की वजह से कुछ सामान जैसे कच्चा माल, मशीनरी, उपकरण और फल-सब्जी मामले में मुश्किल पेश आ रही थी। इन परेशानियों के मद्देनजर नेपाल के भंसार विभाग यानी कस्टम विभाग ने नियमों में ढील देते हुए नया आदेश जारी किया है। इन आदेशों के मुताबिक, अभी आर्थिक वर्ष 2026-2027 के लिए नीति, कार्यक्रम, बजट और आर्थिक कानून बनाने की तैयारी चल रही है, इसलिए MRP से जुड़े नियम और अधिक स्पष्ट करने और अगले आर्थिक वर्ष से लागू करने की जरूरत है।
नेपाल सरकार की सख्ती भारत के बॉर्डर इलाकों की जनता परेशानी थी। लोगों का कहना था कि इस नियम से धार्मिक अनुष्ठानों और खेती-बाड़ी और रोजमर्रा के सामानों तक पहुंच बाधित हो गई थी। ऐसे में बीरगंज, भैरहवा जैसे सीमावर्ती कस्बों और काठमांडू में विरोध-प्रदर्शन होने शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने ऐसे पोस्टर-बैनर ले रखे थे। हालांकि अब सरकार के फैसेल से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
भारत सामानों पर कस्टम ड्यूटी लगाने के फैसले से नेपाल सरकार को भी नुकसान उठाना पड़ रहा था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीरगंज कस्टम प्वाइंट पर पहले कस्टम ड्यूटी से प्रतिदिन करीब 50-60 करोड़ नेपाली रुपए की वसूली होती थी। हालांकि, अब पेट्रोलियम उत्पादों, फल-सब्जियों और औद्योगिक कच्चे माल की आवाजाही में गिरावट आई है। इसके चलते दैनिक कर संग्रह घटकर लगभग 31 करोड़ रुपये के आसपास रह गया है।