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सऊदी अरब के नज्रान एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले का दावा, हूतियों ने ली जिम्मेदारी

Saudi Arabia Najran Airport Attack: यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के नज्रान एयरपोर्ट पर ड्रोन से हमला करने और एक संवेदनशील ठिकाने को निशाना बनाने का दावा किया है।
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Houthi Drone Attack

सऊदी अरब के नज्रान एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला,photo source@AI

Saudi Arabia Najran Airport Attack: यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के नज्रान एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला कर एक संवेदनशील ठिकाने को निशाना बनाने का दावा किया है। हालांकि, सऊदी अरब की ओर से इस कथित हमले की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने टेलीग्राम पर जारी बयान में हमले की जिम्मेदारी ली। हाल ही में सना और अभा एयरपोर्ट पर हुए हमलों के बाद सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच सीमा पर तनाव और संघर्ष काफी बढ़ गया है।

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच हूतियों का बड़ा दावा

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच यमन के सशस्त्र समूह हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के नज्रान एयरपोर्ट पर हमला किया है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने कहा, "हमने ड्रोन का इस्तेमाल कर नज्रान एयरपोर्ट पर सऊदी दुश्मन के एक संवेदनशील ठिकाने को सफलतापूर्वक निशाना बनाया।" उन्होंने दावा किया कि यह हमला सऊदी अरब द्वारा ड्रोन के जरिए सादा और हज्जा प्रांतों के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किए जाने के जवाब में किया गया।

यमन और सऊदी अरब के बीच बढ़ा तनाव

यमन और सऊदी अरब के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। वर्ष 2022 के संघर्षविराम समझौते के बाद पहली बार हालात इतने तनावपूर्ण हुए हैं। इस बीच, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको की सुविधाओं को भी निशाना बनाने का दावा किया है।

हूती हमलों के कारण जाजान प्रोडक्शन प्लांट के प्रभावित होने की भी खबर है, जिसे रियाद के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका-ईरान तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में पहले से ही समुद्री गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

तनाव उस समय और बढ़ गया, जब हूती विद्रोहियों ने घोषणा की कि वे सऊदी अरब से जुड़े वाणिज्यिक (कमर्शियल) जहाजों को बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य से गुजरने नहीं देंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती बाधाओं के बीच बाब-अल-मंडेब, जिसे 'गेट ऑफ टीयर्स' (Gate of Tears) भी कहा जाता है, सऊदी तेल निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग बन गया है।