
Donald Trump Tariff News :ट्रंप के आयात शुल्क पर नया विवाद, 25 राज्यों ने कहा- कानून का हो रहा दुरुपयोग (फोटो सोर्स:@globeandmail)
US Supreme Court Tariff Ruling: अमेरिका में आयात शुल्क (टैरिफ) को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए टैरिफ के खिलाफ 25 राज्यों ने संघीय अदालत का दरवाजा खटखटाया है। राज्यों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले जिन आयात शुल्कों को अवैध ठहराया जा चुका था, उनकी भरपाई के लिए अब नए कानूनी रास्ते का सहारा लिया जा रहा है।
न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने कहा कि प्रशासन सुप्रीम कोर्ट में हार के बाद अमेरिकी परिवारों और कारोबारों पर नए आयात शुल्क का बोझ डालने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक यह कदम कानून की भावना के खिलाफ है और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डालेगा।
ट्रंप प्रशासन ने पिछले महीने 59 देशों और यूरोपीय संघ से आने वाले उत्पादों पर 10% से 12.5% तक का नया टैरिफ लागू किया। व्हाइट हाउस का कहना है कि जिन देशों ने जबरन श्रम (Forced Labor) से बने सामान के आयात पर प्रभावी रोक नहीं लगाई, उनके खिलाफ यह कार्रवाई जरूरी थी।
प्रशासन का दावा है कि ऐसे उत्पाद अमेरिकी उद्योग, श्रमिकों और घरेलू बाजार के लिए नुकसानदेह हैं। इसलिए व्यापार कानून के तहत यह कदम पूरी तरह वैध है।
इस साल फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को व्यापक स्तर पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। अदालत के फैसले के बाद सरकार को उन आयातकों को रकम लौटानी पड़ी जिन्होंने पहले लगाए गए शुल्क का भुगतान किया था।
इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने अस्थायी 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लागू किए, लेकिन उनकी समय-सीमा 24 जुलाई की मध्यरात्रि को समाप्त हो गई। अब प्रशासन ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 (Section 301) का इस्तेमाल करते हुए नए टैरिफ लागू किए हैं, जिसे कानूनी रूप से अधिक मजबूत आधार माना जाता है।
अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 राष्ट्रपति को उन देशों के खिलाफ आयात शुल्क और अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगाने का अधिकार देती है, जो अमेरिका के अनुसार अनुचित व्यापारिक नीतियां अपनाते हैं।
ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में इसी प्रावधान के तहत चीन पर भारी टैरिफ लगाए थे। उन शुल्कों को अदालतों में चुनौती जरूर मिली, लेकिन वे कानूनी जांच में टिके रहे। यही वजह है कि इस बार भी प्रशासन ने उसी रास्ते को चुना है।
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि अमेरिका अपने वैध अधिकारों का उपयोग कर रहा है। उनका कहना है कि जब कोई देश जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तो उससे अमेरिकी व्यापार और श्रमिकों को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में Section 301 के तहत कार्रवाई पूरी तरह उचित और कानूनी है।
मुकदमा दायर करने वाले राज्यों का कहना है कि प्रशासन ने केवल कानूनी आधार बदलकर वही नीति दोबारा लागू करने की कोशिश की है, जिसे सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है। उनका तर्क है कि नए टैरिफ से वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी, महंगाई पर दबाव आएगा और अमेरिकी कंपनियों की लागत भी बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कानूनी लड़ाई लंबी चली तो अमेरिका के व्यापारिक माहौल में अनिश्चितता बढ़ सकती है। आयात करने वाली कंपनियों के लिए लागत का अनुमान लगाना मुश्किल होगा, जबकि निर्यातक देशों के साथ संबंधों में भी तनाव बढ़ने की आशंका है।
दूसरी ओर, ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि ऊंचे टैरिफ से घरेलू विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) को बढ़ावा मिलेगा, विदेशी प्रतिस्पर्धा कम होगी और अमेरिकी उद्योगों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका में व्यापार नीति एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है। ट्रंप लंबे समय से दावा करते रहे हैं कि सख्त टैरिफ नीति के जरिए अमेरिका अपने उद्योगों को मजबूत बना सकता है। वहीं विपक्षी राज्य सरकारों का कहना है कि बार-बार बदली जा रही टैरिफ नीति से कारोबार, निवेश और उपभोक्ताओं के हित प्रभावित हो रहे हैं।
अब सबकी नजर अदालत पर टिकी है। यदि अदालत राज्यों के पक्ष में फैसला देती है तो ट्रंप प्रशासन की नई व्यापारिक रणनीति को बड़ा झटका लग सकता है। वहीं यदि सरकार को राहत मिलती है तो Section 301 के तहत लगाए गए ये टैरिफ अमेरिकी व्यापार नीति का स्थायी हिस्सा बन सकते हैं।
Updated on:
04 Aug 2026 08:05 am
Published on:
04 Aug 2026 08:05 am
