इजरायल-अमेरिका और ईरान युद्ध के बीच कतर ने स्पष्ट चेतावनी दे दी है। उसका कहना है कि यदि युद्ध कुछ दिनों तक और जारी रहता है तो खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा निर्यातकों को ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित करना पड़ सकता है।
Qatar Force Majeure Warning: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बीच दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को लेकर बड़ी चिंता सामने आई है। अब कतर ने साफ चेतावनी दी है कि अगर इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष कुछ दिन और बढ़ता है, तो खाड़ी देशों को ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित करना पड़ सकता है।
इसका मतलब है कि तेल और गैस की सप्लाई अचानक रुक सकती है। कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने साफ कहा कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो दुनियाभर में तेल और गैस के दाम में भारी उछाल आ सकती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह युद्ध अब वैश्विक ऊर्जा संकट की वजह बन सकता है?
अगर किसी तेल कंपनी को युद्ध, हमले या प्राकृतिक आपदा की वजह से तेल और गैस की सप्लाई रोकनी पड़ जाए, तो वह ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित कर सकती है। इसका मतलब होता है कि कंपनी हालात के कारण सप्लाई नहीं कर पा रही है और इसे अनुबंध तोड़ने की गलती नहीं माना जाएगा।
कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर मिडिल ईस्ट में मौजूदा तनाव जारी रहता है, तो खाड़ी क्षेत्र के कई ऊर्जा निर्यातकों को आने वाले दिनों में ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित करना पड़ सकता है। उनका कहना है कि जो कंपनियां ऐसा नहीं करेंगी, उन्हें कानूनी तौर पर भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तेल और गैस ले जाने वाले टैंकर समुद्री रास्तों से नहीं गुजर पाए, तो अगले 2–3 हफ्तों में कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। वहीं प्राकृतिक गैस की कीमतें चार गुना बढ़कर करीब 40 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक जा सकती हैं। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि अगर हमले तुरंत बंद भी हो जाएं, तब भी निर्यात संचालन सामान्य होने में हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है, क्योंकि लॉजिस्टिक्स में गंभीर बाधाएं आई हैं।
इस तनाव का असर बाजार में भी दिख रहा है। इस हफ्ते ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 20% और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट की कीमत लगभग 25% बढ़ चुकी है, जो पिछले कई महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है।
इसी बीच खबर आ रही है कि ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। इन हमलों के दौरान बहरीन की एक तेल रिफाइनरी को भी निशाना बनाया गया, जिससे ऊर्जा बाजार में चिंता और बढ़ गई है।