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मुनीर-शहबाज ने कभी सोचा नहीं होगा? एक हफ्ते में मारे गए 362 पाक सैनिक, 17 बंधक में, तबाही वाला ऑपेरशन खत्म

बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने 'ऑपरेशन हेरोफ' का दूसरा चरण पूरा कर लिया। यह अभियान 31 जनवरी सुबह 5 बजे से 6 फरवरी शाम 4 बजे तक चला।

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Feb 07, 2026
पाक सेना। (फोटो- IANS)

एक खतरनाक ऑपरेशन से पाकिस्तानी की सेना को बड़ा नुकसान पहुंचा है। बलूच आजादी समर्थक संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने शुक्रवार को कहा कि उसके ऑपरेशन का दूसरा चरण पूरा हो गया है। इस अभियान का नाम 'ऑपरेशन हेरोफ' दिया गया था। यह बलूचिस्तान के कई शहरों में छह दिनों तक चला।

बीएलए के प्रवक्ता जीयांद बलूच ने कहा कि यह ऑपरेशन 31 जनवरी को सुबह 5 बजे शुरू हुआ और 6 फरवरी को शाम 4 बजे खत्म हुआ। बलूचिस्तान के 14 शहरों में ऑपरेशन चला। यह समूह के इतिहास में सबसे बड़ा, सबसे तीव्र और सबसे संगठित सैन्य अभियान था।

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एक साथ कई जगहों पर हुए हमले

जियांत ने आगे कहा कि बलूच लड़ाकों ने एक साथ हमले किए और कई जगहों पर सुरक्षा चौकियों, सैन्य ठिकानों और शहरी इलाकों के हिस्सों पर कब्जा कर लिया।

प्रवक्ता ने दावा किया कि कई शहरों में, बलूच लिबरेशन आर्मी की इकाइयों ने लगातार छह दिनों तक मोर्चा संभाले रखा, जिससे पाकिस्तानी सेना को लगातार पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा।

बलोच के कई लड़ाके मारे गए

जियांत ने कहा कि इससे देश को राजनीतिक, मनोवैज्ञानिक और सैन्य रूप से भारी नुकसान हुआ। प्रवक्ता ने कहा कि ऑपरेशन के दौरान कुल 93 बलूच लड़ाके मारे गए।

समूह के अनुसार, इनमें मजीद ब्रिगेड के 50 सदस्य, फतेह स्क्वाड के 26 और स्पेशल टैक्टिकल ऑपरेशंस स्क्वाड के 17 सदस्य शामिल थे।

इसके अलावा, बलोच आर्मी ने यह भी दावा किया कि ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के 362 से ज्यादा जवान मारे गए। जबकि 17 से अधिक पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों को बंधक बनाया गया है।

10 जवानों को कर दिया गया आजाद

प्रवक्ता ने कहा कि इनमें पाकिस्तानी सेना, फ्रंटियर कोर, पुलिस और राज्य समर्थित सशस्त्र समूहों के सदस्य शामिल हैं। हिरासत में लिए गए लोगों में से 10 को बलूच होने की चेतावनी देने के बाद रिहा कर दिया गया, जबकि सात अभी भी समूह की हिरासत में हैं।

उन्होंने कहा कि बाकी हिरासत में लिए गए लोगों पर युद्ध अपराधों और नरसंहार के कृत्यों में कथित संलिप्तता के लिए कार्रवाई की जाएगी। बयान में यह भी कहा गया कि दर्जनों मिलिट्री ठिकानों को नुकसान पहुंचा, हथियार जब्त किए गए।

क्या था ऑपरेशन का उद्देश्य?

उन्होंने इस अभियान के तीन मुख्य उद्देश्य बताए। उन्होंने कहा कि पहला उद्देश्य यह दिखाना था कि बलूच लड़ाकों में अपनी पसंद के समय और जगहों पर शहरी केंद्रों पर हमला करने और उन पर कंट्रोल करने की क्षमता है।

दूसरा उद्देश्य बलूच आबादी को यह बताना था कि यह प्रतिरोध सामूहिक आत्मविश्वास और संगठनात्मक ताकत पर टिका है। तीसरा उद्देश्य उस चीज को चुनौती देना था जिसे ग्रुप ने पूरे बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के कथित और बिना चुनौती वाले दबदबे के रूप में बताया था।

जानबूझकर लिया गया ऐसा फैसला

प्रवक्ता ने कहा कि शहरी युद्ध करने का फैसला जानबूझकर लिया गया था। उनके अनुसार, जिन शहरों को पाकिस्तानी सेना सुरक्षित गढ़ मानती थी, उन्हें जानबूझकर इसलिए चुना गया ताकि यह दिखाया जा सके कि बलूच आंदोलन अब सिर्फ पहाड़ी इलाकों तक सीमित नहीं है।

उन्होंने कहा कि ग्रुप ने प्रमुख मिलिट्री साइट्स, चौकियों और शहरी जगहों पर इतने लंबे समय तक कंट्रोल बनाए रखा ताकि स्थानीय आबादी और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय दोनों को यह संदेश दिया जा सके कि वह अपनी रणनीति खुद बना सकता है और युद्ध के मैदान को अपनी शर्तों पर आकार दे सकता है।

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