पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर के हालिया बयानों से ईरान को लेकर विवाद बढ़ा है। आलोचकों ने उन पर तीखा हमला किया और सेना पर गिलगित-बाल्टिस्तान में सांप्रदायिक विभाजन बढ़ाने व विरोध दबाने का आरोप लगाया।
पाकिस्तान में सेना प्रमुख आसिम मुनीर के कुछ बयानों और ईरान को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। आलोचकों ने मुनीर पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
साथ ही उन्होंने सेना पर आरोप लगाया है कि वह पाकिस्तान-अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान जैसे संवेदनशील इलाकों में सांप्रदायिक दरार को गहरा कर रही है और विरोध की आवाज को दबा रही है।
उधर, गिलगित-बाल्टिस्तान स्टडीज इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष सेंगे सेरिंग ने पाकिस्तान की बदलती विदेश नीति की प्राथमिकताओं की जमकर आलोचना की।
साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान जैसे देशों के प्रति उसका रवैया वित्तीय और रणनीतिक लाभों के आधार पर बदलता रहता है।
उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह की असंगति अल्पसंख्यक समुदायों व क्षेत्रीय हितधारकों के बीच भरोसे को और कमजोर करती है।
एक वीडियो बयान में सेरिंग ने मुनीर के उन कथित टिप्पणियों की कड़ी निंदा की, जो माना जा रहा है कि शिया मुसलमानों को निशाना बनाकर की गई थीं। उन्होंने इन टिप्पणियों की व्याख्या इस तरह की कि ये वफादारी साबित करने या फिर ईरान चले जाने की मांग हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह की बयानबाजी बढ़ती असहिष्णुता को उजागर करती है और पाकिस्तान की सत्ता संरचना के भीतर एक परेशान करने वाली सोच को दर्शाती है।
सेरिंग ने आगे पाकिस्तान की सेना पर आरोप लगाया कि वह अपने ही नागरिकों की भलाई के बजाय वित्तीय और रणनीतिक हितों को ज्यादा प्राथमिकता देती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सेना ने ऐतिहासिक रूप से भू-राजनीतिक लाभ के लिए उग्रवादी नेटवर्क का समर्थन किया है, जबकि आम लोगों को अस्थिरता व हिंसा का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
सेरिंग के अनुसार, यह सिलसिला सेना की जवाबदेही और राष्ट्रीय एकता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
वहीं, गिलगित-बाल्टिस्तान में मौजूदा हालात पर रोशनी डालते हुए सेरिंग ने दावा किया कि यह इलाका दशकों से लंबे समय से चले आ रहे कब्जे के अधीन है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थानीय लोग सेना की मौजूदगी का लगातार विरोध कर रहे हैं और ज्यादा आजादी की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि इस इलाके में शिया और सुन्नी, दोनों समुदायों को अपनी पहचान, संसाधनों और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहना चाहिए।
सेरिंग ने खुलकर यह भी कहा कि गिलगित-बाल्टिस्तान संवैधानिक रूप से पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। उन्होंने इस इलाके की राजनीतिक स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ज्यादा ध्यान आकर्षित करने की अपील की।
उन्होंने वहां के निवासियों से आग्रह किया कि वे क्षेत्रीय एकता पर ध्यान दें और अपने सामाजिक-सांस्कृतिक हितों को लद्दाख जैसे पड़ोसी इलाकों के हितों के साथ जोड़ें। ये बयान पाकिस्तान में सांप्रदायिक तनाव और शासन-प्रशासन से जुड़ी चुनौतियों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच सामने आए हैं।