
पीओके (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों की खबरों को दबाने के लिए पाकिस्तान (Pakistan) ने अब डिजिटल सेंसरशिप (Digital Censorship) को हथियार बना लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पीओके में अशांति, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और बढ़ते जन असंतोष की खबरें प्रकाशित करने वाले कई स्थानीय और क्षेत्रीय समाचार वेबसाइटों की पहुंच सीमित कर दी गई है। कुछ अंतर्राष्ट्रीय समाचार प्रसारण मंच भी पाकिस्तान के कई हिस्सों में उपलब्ध नहीं हैं। जिन प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की गई है, उनमें पाकिस्तान की मुख्य विपक्षी पार्टी, उसके नेता और जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से जुड़े चैनल, साथ ही सरकार की आलोचना करने वाले कई पत्रकारों के यूट्यूब चैनल भी शामिल हैं। खबर है कि पीओके में आम नागरिकों की मौत का आंकड़ा बढ़कर 67 हो गया है। पीओके में विरोध प्रदर्शनों की जो आग भड़क रही है, उसका कवरेज भी पाकिस्तान में नहीं किया जा सकता।
जुलाई में इस्लामाबाद की एक न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने पाकिस्तान की नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर कई यूट्यूब चैनलों को ब्लॉक करने का आदेश दिया था। एजेंसी का आरोप था कि इन चैनलों पर ऐसी सामग्री प्रकाशित की गई, जो सरकारी संस्थानों और अधिकारियों के खिलाफ डर पैदा करने वाली, उकसाने वाली और अपमानजनक थी। इन चैनलों ने पीओके में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को दिखाया था। पाकिस्तानी सरकार और सेना नहीं चाहती कि देश की जनता पीओके में हो रहे विरोध प्रदर्शनों और इन्हें काबू में करने में सरकार और सेना की नाकामी देखें और इसी वजह से यह कदम उठाया गया है।
डिजिटल अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने इन प्रतिबंधों पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की आज़ादी और ज़्यादा सीमित हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार पहले से ही टेलीविजन और प्रिंट मीडिया पर कड़े नियंत्रण हैं, ऐसे में सोशल मीडिया ही सार्वजनिक बहस और असहमति व्यक्त करने का प्रमुख माध्यम बचा है। यूट्यूब ने 27 कंटेंट क्रिएटर्स को नोटिस भेजकर चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया तो उनके चैनल पाकिस्तान में ब्लॉक किए जा सकते हैं।