
Pakistan News: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में एक बार फिर सियासी हलचल तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। देश की मिलिट्री और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बीच तनाव को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। यह दावा ‘मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट’ (MQM) के संस्थापक और ब्रिटिश-पाकिस्तानी लीडर अल्ताफ हुसैन ने किया है। उन्होंने दोनों के बीच साइलेंट स्ट्रगल चलने की बात कही है। हुसैन का दावा है कि पाकिस्तान में नए प्रोविंस बनाने को लेकर चर्चा चल रही है। इसे लेकर सत्ता के अलग-अलग केंद्रों में मतभेद बढ़ सकते हैं। उन्होंने आने वाले समय में बड़े राजनीतिक और सुरक्षा संकट की आशंका भी जताई है।
अल्ताफ हुसैन ने संभावित 28वें संविधान संशोधन को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक इसमें नए प्रोविंस बनाने का प्रावधान शामिल हो सकता है। उन्होंने कहा कि नए प्रोविंस बनाने की चर्चा इंटीरियर मिनिस्टर मोहसिन नकवी और DG-ISPR की ओर से उठाई गई है।
हुसैन का आरोप है कि इस प्रस्ताव के पीछे राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने 26वें और 27वें संविधान संशोधन का भी जिक्र किया। उनका आरोप है कि इन संशोधनों को पास कराने के लिए राजनीतिक दलों के बीच पहले ही सहमति बन गई थी।
अल्ताफ हुसैन ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की विदेश यात्रा को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि जरदारी अपने बेटे बिलावल भुट्टो जरदारी की शादी से जुड़े कार्यक्रम के लिए ऑस्ट्रिया गए थे। इसके बाद उनके लंदन में होने की बात कही।
हुसैन ने लंदन में जरदारी और मोहसिन नकवी के बीच करीब एक घंटे की मुलाकात का भी दावा किया। उनके मुताबिक इस बैठक में राष्ट्रपति को एक अहम संदेश दिया गया।
अल्ताफ हुसैन ने पाकिस्तान के सामने बड़े संकट की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि अगर राजनीतिक गतिरोध बढ़ता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने मार्शल लॉ या अंतरिम सरकार जैसी संभावनाओं का भी जिक्र किया।
हुसैन ने सिंधी राष्ट्रवादी समूहों और पाकिस्तानी मिलिट्री के बीच तनाव को लेकर भी चेतावनी दी। उन्होंने बलूचिस्तान के हालात का जिक्र किया। उनके मुताबिक वहां सुरक्षा बलों और बलूच लड़ाकों के बीच हिंसा जारी है।
उन्होंने पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व से बलूच लोगों के मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देने की अपील की। साथ ही चेताया कि अगर देश बड़े आंतरिक संघर्ष में फंसता है, तो अमेरिका और ब्रिटेन जैसी विदेशी ताकतों से मदद की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। इन बयानों के बाद पाकिस्तान की राजनीति और मिलिट्री के रिश्तों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
हुसैन साफ कहना था कि प्रपोज्ड कॉन्स्टिट्यूशनल बदलाव प्रेसिडेंट आसिफ अली जरदारी और मिलिट्री लीडरशिप के बीच बढ़ते मतभेदों को दिखाते हैं। पॉलिटिकल डेडलॉक से गंभीर कॉन्स्टिट्यूशनल नतीजे हो सकते हैं, जिसमें मार्शल लॉ लगाना या इंटरिम सरकार बनाना शामिल है।
इस्लामाबाद.पाकिस्तानी सेना के प्रमुख आसिम मुनीर की ताकत को पीएम शहबाज शरीफ की सरकार ने और बढ़ा दिया है। देश के इतिहास में पहली बार संसद ने एक ही सैन्य अधिकारी को सेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त कमान सौंप दी है। नेशनल असेंबली से डिफेंस फोर्सेस ऑफ पाकिस्तान एक्ट 2026 पास करते हुए चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस का पद बनाया गया है। इसी के साथ अब आधिकारिक तौर पर आसिम मुनीर पाकिस्तान के पहले सीडीएफ बन गए हैं। 1976 के बाद से पाकिस्तान सैन्य कमान में यह सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है।