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Bangladesh Missing Children: बांग्लादेश में बच्चों के लापता होने के आंकड़ों ने उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2026 के बीच देशभर में 15,917 बच्चों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई। आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार इन आंकड़ों के सामने आने के बाद जर्मनी स्थित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर ह्यूमन राइट्स (ISHR) ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। ISHR के मुताबिक, इन सात महीनों में औसतन हर दिन 75 से अधिक बच्चों के लापता होने की रिपोर्ट सामने आई। संगठन ने कहा कि हर लापता बच्चे के पीछे एक ऐसा परिवार है, जो अनिश्चितता, डर और मानसिक तनाव से गुजर रहा है। इसे महज आंकड़ा या सामान्य गुमशुदगी का मामला नहीं माना जाना चाहिए।
पुलिस के आंकड़ों का हवाला देते हुए ISHR ने बताया कि जनवरी में 1,768, फरवरी में 1,392 और मार्च में 1,708 बच्चों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई। अप्रैल में यह आंकड़ा बढ़कर 2,660 हो गया। मई में 256 मामले दर्ज हुए, जबकि जून में अचानक बड़ी बढ़ोतरी हुई और 3,163 बच्चे लापता बताए गए। यह सात महीनों में किसी एक महीने का सबसे बड़ा आंकड़ा था। जुलाई में 311 मामले सामने आए। इन आंकड़ों में महीने-दर-महीने काफी अंतर दिखाई देता है। ISHR ने पुलिस आंकड़ों के आधार पर इन मामलों को बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंता बताया है।
मानवाधिकार संगठन के मुताबिक, बांग्लादेश में कई परिवारों का आरोप है कि बच्चों के लापता होने के बाद जांच और तलाश अभियान उस तेजी से शुरू नहीं होते, जिसकी ऐसे मामलों में जरूरत होती है। ISHR ने कहा कि शुरुआती घंटों में होने वाली देरी बच्चे को खोजने के महत्वपूर्ण मौकों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए हर लापता बच्चे की रिपोर्ट को आपात स्थिति मानकर तत्काल और पेशेवर तरीके से कार्रवाई की जानी चाहिए। संस्था ने कहा कि बच्चे समाज के सबसे कमजोर वर्गों में आते हैं और उनकी सुरक्षा के लिए पुलिस और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी है।
ISHR ने बांग्लादेश के अपराध विशेषज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के हवाले से कहा कि बच्चों के बड़ी संख्या में लापता होने के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं।इनमें संगठित मानव तस्करी नेटवर्क, फिरौती के लिए अपहरण, बच्चों से जबरन भीख मंगवाना, आपराधिक गतिविधियों में बच्चों का इस्तेमाल, पारिवारिक विवाद और व्यक्तिगत संघर्ष शामिल हैं। संगठन ने यह भी कहा कि इन घटनाओं की व्यापक तस्वीर कानून-व्यवस्था, संगठित अपराध, ड्रग से जुड़े अपराध, कानून लागू करने वाली एजेंसियों की कमजोरियों और न्याय व्यवस्था में देरी को लेकर भी सवाल उठाती है।हालांकि, इन कारणों को लापता बच्चों के सभी मामलों का स्थापित कारण नहीं बताया गया है। ये वे संभावित कारण हैं जिनका जिक्र ISHR ने बांग्लादेश के एक्सपर्ट और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के हवाले से किया है।
ISHR ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह मौलिक मानवाधिकार का मामला भी है। संगठन के मुताबिक, हर बच्चे को सुरक्षित जीवन जीने, शोषण और हिंसा से बचाए जाने और सम्मान तथा सुरक्षा वाले माहौल में बड़े होने का अधिकार है। मानवाधिकार संगठन ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों के लापता होने के मामलों में तत्काल कार्रवाई जरूरी है, क्योंकि शुरुआती समय में प्रभावी तलाश से बच्चे को सुरक्षित वापस लाने की संभावना बढ़ सकती है।
Updated on:
5 Sep 2026, 9:28 PM IST
Published on:
5 Sep 2026, 9:26 PM IST
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