
पाकिस्तान (Pakistan) की कंगाल स्थिति किसी से भी छिपी नहीं है। देश की अर्थव्यवस्था की कमर टूट चुकी है और उधार के भरोसे ही पाकिस्तान का काम चल रहा है। मित्र देशों के साथ ही इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड - आईएमएफ (International Monetary Fund - IMF) भी पाकिस्तान के लिए उधार लेने का मुख्य स्त्रोत है। हालांकि इससे देश की स्थिति सुधर नहीं रही है। पाकिस्तान में गरीबी दर तेज़ी से बढ़ रही है और इसके साथ ही बेरोजगारी भी बढ़ रही है।
एक रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में पाकिस्तान में गरीबी दर में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई और यह बढ़कर 28.9% हो गई। इतना ही नहीं, पाकिस्तान में बेरोजगारी भी बढ़ी है। इसके बढ़ने की दर 12.69% रही।
इस रिपोर्ट के आंकड़ों से पता चलता है कि सोशल वेलफेयर पर खर्च बढ़ाने के बावजूद पाकिस्तान में परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि प्रांतीय अनुमानों से पता चलता है कि सभी प्रमुख क्षेत्रों में गरीबी की स्थिति और खराब हुई है। बढ़ती गरीबी की वजह से छोटी उम्र से ही बच्चों को मजदूरी करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
पाकिस्तान के पंजाब में गरीबी दर 16.5% से बढ़कर 23.3% हो गई, जबकि सिंध प्रांत में यह दर बढ़कर 24.5% से 32.6% हो गई। वहीँ खैबर पख्तूनख्वा में गरीबी दर 28.7% से बढ़कर 35.3% हो गई, जबकि बलूचिस्तान देश का सबसे गरीब प्रांत बना रहा, जहाँ गरीबी दर 41.8% से बढ़कर 47% हो गई।
रिपोर्ट के अनुसार बेरोजगार लोगों की संख्या 45 लाख से बढ़कर 59 लाख हो गई। ये आंकड़े बताते हैं कि व्यापक आर्थिक दबावों के बीच रोजगार के अवसर पैदा करने और परिवारों की आय बढ़ाने में लगातार चुनौतियाँ सामने आ रही हैं।
पाकिस्तान ने वित्त वर्ष 2025-26 में बेनजीर इनकम सपोर्ट प्रोग्राम (BISP) के लिए करीब 24.7 हज़ार करोड़ पाकिस्तानी रूपए आवंटित किए, जो देश की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा पहल है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस राशि में से करीब 18.4 हज़ार करोड़ रूपए जारी किए जा चुके हैं। BISP कम आय वाले परिवारों को नकद सहायता प्रदान करता है और पाकिस्तान की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली का सबसे बड़ा हिस्सा बना हुआ है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि गरीबी को लगातार कम करने के लिए रोजगार के ज़्यादा अवसर पैदा करने, शिक्षा और कौशल विकास में निवेश करने, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार करने और सीधे नकद-हस्तांतरण कार्यक्रमों से परे व्यापक आर्थिक विकास की ज़रूरत होगी। ग्रामीण औद्योगीकरण और छोटे उद्यम टिकाऊ रोजगार और आय के अवसरों के लिए महत्वपूर्ण कारक हैं। कल्याणकारी योजनाओं पर लंबे समय तक निर्भरता कम करने और शिक्षा को लेबर मार्केट की ज़रूरतों के हिसाब से बेहतर बनाने के लिए डिग्री देने वाले संस्थानों में नौकरी के लिए ज़रूरी स्किल्स और एंटरप्रेन्योरशिप स्किल्स को शामिल किया जाना चाहिए।