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बंटवारे के 8 दशक बाद लाहौर की गलियों को मिले पुराने नाम, इस्लामपुरा बना कृष्ण नगर, बाबरी मस्जिद चौक कहलाएगा जैन मंदिर चौक

Pakistan streets renamed: पाकिस्तान के लाहौर में प्री पार्टिशन दौर के कई ऐतिहासिक नाम बहाल किए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम शहर की साझा सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

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May 19, 2026
Pakistan streets renamed
पाकिस्तान में लाहौर की सड़कों के नाम बदले गए (फोटो - Mudit Jain एक्स पोस्ट)

Pakistan streets renamed: भारत और पाकिस्तान के विभाजन को लगभग अस्सी वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन पंजाब की साझा सांस्कृतिक स्मृतियां अब भी लोगों के बीच जिंदा हैं। लाहौर उन शहरों में शामिल रहा है जहां हिंदू, सिख, मुस्लिम, जैन और ईसाई समुदायों ने लंबे समय तक साथ रहकर सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान बनाई थी। इसी चीज का सम्मान करते हुए अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक नई पहल की शुरुआत की गई है। इसके तहत शहर की कई सड़कों, चौकों और इलाकों के बंटवारे से पहले के नाम दोबारा बहाल किए जा रहे हैं। इस फैसले के बाद इस्लामपुरा फिर कृष्ण नगर और मुस्तफाबाद दोबारा धरमपुरा कहलाने लगा है।

कुल 9 जगहों के नाम बदलकर पुराने नाम रखे गए

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लाहौर और आसपास के क्षेत्रों के पुराने नाम बहाल करने की योजना को मंजूरी दी गई। लक्ष्मी चौक, डेविस रोड और क्वींस रोड जैसे स्थानों को भी उनके पुराने नामों से जोडा गया है। बदलाव के बाद अब से बाबरी मस्जिद चौक को वापस जैन मंदिर चौक के नाम से जाना जाएगा और सुन्नत नगर संत नगर कहलाएगा। इस तरह कुल 9 जगहों के नाम बदलकर पुराने नाम रखे गए है। पिछले दो महीनों में लाहौर के कई इलाकों में इन पुराने नाम वाले साइनबोर्ड भी लगा दिए गए है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि लाहौर की बहुस्तरीय सांस्कृतिक विरासत को लाने का प्रयास है।

एक समुदाय से नहीं जुडी लाहौर की पहचान

लाहौर को हमेशा साझा पंजाबी संस्कृति का केंद्र माना जाता रहा है। अमृतसर से करीब पचास किलोमीटर दूर स्थित यह शहर विभाजन से पहले शिक्षा, व्यापार, खेल और कला का प्रमुख केंद्र था। विभाजन के बाद यहां से हजारों हिंदू और सिख परिवारों का पलायन हुआ और धीरे धीरे कई इलाकों के नाम बदल दिए गए। वॉल्ड सिटी ऑफ लाहौर अथोरिटी (WCLA) से जुडे पूर्व अधिकारी कमरान लशारी ने कहा कि लाहौर की पहचान केवल एक समुदाय से नहीं जुडी, बल्कि यह शहर कई संस्कृतियों की साझी विरासत है।

लाहौर किले में सिख शाही परिवार की वंशज की पेंटिंग बहाल की गई

लाहौर में इस समय सौ से अधिक मान्यता प्राप्त विरासत स्थलों पर संरक्षण कार्य चल रहा है। इसमें चर्च, सिख काल की इमारतें और महाराजा रणजीत सिंह से जुडे ढांचे भी शामिल हैं। लाहौर किले में सिख शाही परिवार की वंशज प्रिंसेस बंबा सदरलैंड की पेंटिंग भी बहाल की गई है। रिपोर्ट के अनुसार नवाज शरीफ ने मिंटो पार्क के पुराने क्रिकेट मैदान और अखाडों को फिर विकसित करने का सुझाव दिया है। यही मैदान कभी गामा पहलवान, इमाम बख्श, लाला अमरनाथ और इंजमाम उल हक जैसे दिग्गजों की पहचान हुआ करते थे।

Published on:
19 May 2026 12:31 pm