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POK में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना ने चलाई गोलियां, 30 की मौत और 200 घायल

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में JAAC पर प्रतिबंध और चुनावी आरक्षण विवाद के बाद हिंसक प्रदर्शन भड़क गए। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों की झड़प में 30 से अधिक लोगों की मौत और करीब 200 लोग घायल हुए हैं।

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Jun 09, 2026
Pakistani army opened fire on protesters
पाकिस्तानी सेना ने प्रदर्शकारियों पर चलाई गोलियां (फोटो- Nikhil Tiwari Tiwari एक्स पोस्ट)

BREAKING: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में राजनीतिक और आर्थिक असंतोष एक बार फिर हिंसक रूप में सामने आया है। पिछले कई महीनों से क्षेत्र में महंगाई, प्रशासनिक फैसलों और प्रतिनिधित्व को लेकर विरोध जारी था। इसी बीच संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए है। इसी बीच स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए पाकिस्तानी सेना द्वारा प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध फायरिंग करने की खबर सामने आई है। सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई के दौरान 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई और करीब 200 लोग घायल बताए जा रहे हैं।

पीओके प्रशासन ने JAAC को गैरकानूनी घोषित किया

पीओके प्रशासन ने शुक्रवार को ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) को गैरकानूनी घोषित कर दिया। प्रशासन का कहना है कि संगठन की गतिविधियों से कानून व्यवस्था और सुरक्षा को खतरा था। इसके बाद क्षेत्र में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। संगठन ने 27 जुलाई को होने वाले विधानसभा चुनावों में शरणार्थियों के लिए 12 सीटें आरक्षित किए जाने का विरोध किया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह फैसला स्थानीय जनता के अधिकारों और राजनीतिक संतुलन के खिलाफ है। इसी मुद्दे को लेकर संगठन ने आम हड़ताल और बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया था, जिसके बाद तनाव लगातार बढ़ता गया।

एक प्रदर्शनकारी की मौत के बाद शुरू हुई झड़प

रविवार को स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब प्रदर्शनकारी एक अस्पताल की मोर्चरी के बाहर जमा हुए। यहां संगठन के एक सदस्य का शव लाया गया था, जिसकी मौत कथित तौर पर पुलिस फायरिंग में हुई थी। पुलिस के अनुसार, सुरक्षा बलों ने भीड़ को हटाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने जवाब में पेट्रोल बम, हथियार और ऑटोमेटिक राइफल का इस्तेमाल किया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तेज संघर्ष शुरू हो गया। पूंच सेक्टर के कमिश्नर सरदार वहीद खान ने कहा कि सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में छह प्रदर्शनकारी मारे गए। हालांकि स्थानीय लोगों और संगठन समर्थकों का दावा है कि वास्तविक मौतों की संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा है।

JAAC पहले भी कर चुका आंदोलन

विश्लेषकों का मानना है कि हालिया हिंसा केवल चुनावी मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से चल रहे आर्थिक और प्रशासनिक असंतोष का परिणाम भी है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पहले भी बिजली दरों, कर व्यवस्था और स्थानीय अधिकारों को लेकर आंदोलन करती रही है। मौजूदा हालात ने क्षेत्र की सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिक संगठनों ने स्वतंत्र जांच और शांतिपूर्ण समाधान की मांग की है। दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी और चुनाव प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार पूरी कराई जाएगी।

Updated on:
09 Jun 2026 03:29 pm
Published on:
09 Jun 2026 02:58 pm