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EU का बड़ा एक्शन प्लान: रूस पर टूटेगा प्रतिबंधों का पहाड़, 200 कंपनियां और 75 मिलिट्री-इंडस्ट्री नेटवर्क के नाम रडार पर

EU Sanctions on Russia 2025: पुतिन के यूक्रेन शांति वार्ता में शामिल न होने पर EU रूस पर 17वां प्रतिबंध पैकेज लागू करने जा रहा है।

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May 20, 2025
पुतिन के शांति वार्ता में शामिल न होने पर EU रूस पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है। (फोटो क्रेडिट: ANI)

EU Sanctions on Russia 2025: रूस और यूक्रेन के बीच जंग के चलते यूरोपीय यूनियन ((Ukraine War EU Response) )ने रूस पर कड़े प्रतिबंधों को लागू (EU Russia Sanctions) करने की तैयारी कर ली है। EU आज ब्रुसेल्स (Brussels Russia Action)में नई पाबंदियों का ऐलान करेगा, जिसमें 200 रूसी पोतों, 30 कंपनियों और 75 मिलिट्री-इंडस्ट्री नेटवर्क से जुड़े लोगों को शामिल किया जाएगा। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से इस्तांबुल शांति वार्ता (Putin Peace Talks 2025) में हिस्सा न लेने के बाद यह कार्रवाई की जा रही है। अज जज़ीरा व पोलिटिको यूरोप ने इस आशय की रिपोर्ट दी है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्त्ज ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए साफ कह दिया है कि रूस ने एक बार फिर विश्वास तोड़ा है। उन्होंने कहा, "जेलेंस्की का इस्तांबुल जाना उम्मीद की किरण थी, लेकिन पुतिन ने गैर हाजिर रह कर फिर निराश किया है।"

रूसी ऑइल फ्लीट और संपत्तियों पर गिरेगी गाज (Russia Asset Seizure)

EU के 17वें प्रतिबंध पैकेज में विशेष ध्यान रूस की 'शैडो ऑइल फ्लीट' पर है — वो टैंकर जो प्रतिबंधों से बच कर तेल सप्लाई कर रहे हैं। प्रतिबंधों के तहत इनके साथ-साथ कई शिपिंग कंपनियां भी निशाने पर होंगी।

फ्रीज की गई रूसी संपत्तियों में से कुछ संपत्तियां जब्त करने पर गौर

ब्रुसेल्स स्थित यूरोपीय यूनियन के एक वरिष्ठ राजनयिक सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि EU अब 300 अरब डॉलर से अधिक की फ्रीज की गई रूसी संपत्तियों में से कुछ संपत्तियां जब्त करने पर गौर कर रहा है, जिनमें से 198 अरब डॉलर जायदाद बेल्जियम में हैं। हालांकि इसके लिए कानूनी रास्ता और बाजार पर प्रभाव दो बड़े कारक होंगे।

ट्रंप-पुतिन फोन कॉल: युद्ध विराम की उम्मीदें जगीं

इस बीच सोमवार रात डोनाल्ड ट्रंप ने पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की, और बाद में पुतिन से फोन पर बात की थी। ट्रंप और पुतिन के बीच दो घंटे लंबी चर्चा हुई, जिसमें रूस-यूक्रेन युद्ध पर गहन विचार-विमर्श हुआ। पुतिन ने साफ तौर पर संकेत दिया है कि यदि सही शर्तें बनती हैं तो ही "युद्ध विराम मुमकिन है।"

एक खतरनाक मिसाल बन सकता है

यूरोपीय यूनियन की इस घोषणा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंता जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर EU रूसी संपत्तियों को जब्त करने जैसा कदम उठाता है, तो यह एक खतरनाक मिसाल बन सकता है।

“यह सिर्फ रूस तक सीमित नहीं रहेगा। कल को यही कदम किसी और देश की संपत्तियों पर भी लागू हो सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और सरकारों का विश्वास यूरोपीय वित्तीय संस्थाओं से डगमगा सकता है।”
— थॉमस क्रूगर, अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ, बर्लिन

रूस की संभावित प्रतिक्रिया व G7 देशों की विशेष बैठक

क्रेमलिन प्रवक्ता ने संकेत दिया है कि यदि संपत्तियों को जब्त किया गया, तो रूस यूरोप में मौजूद विदेशी संपत्तियों और निवेशों को "रोक" सकता है या जब्त कर सकता है। इधर आने वाले हफ्ते में G7 देशों की विशेष बैठक बुलाए जाने की संभावना है, जिसमें रूस के खिलाफ समन्वित रणनीति पर विचार होगा।

रूस के फ्रीज फंड्स पर EU की नजर क्यों ?

जानकारी के अनुसार EU की नज़र अब उन $300 अरब डॉलर की रूसी संपत्तियों पर है, जो 2022 से फ्रीज कर दी गई थीं। इस राशि का इस्तेमाल यूक्रेन के पुनर्निर्माण (Rebuilding Ukraine) के लिए किया जा सकता है। लेकिन सवाल यह है कि:

क्या यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध होगा?
क्या इससे वैश्विक बैंकिंग व्यवस्था में अस्थिरता आएगी?

रूस की अर्थव्यवस्था पर असर

अगर EU ने रूसी फंड जब्त किए, तो भविष्य में ब्रिक्स जैसे गठबंधन अपने भंडार यूरोप या अमेरिका में रखने से हिचक सकते हैं। इसका मतलब है — पश्चिमी वित्तीय संस्थानों में वैश्विक विश्वास डगमगाना।

इस मुद्दे पर भारत और चीन की भूमिका

रूस के करीबी सहयोगी देश, खासकर चीन और भारत, इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देंगे या तटस्थ रहेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा। दोनों देशों ने अब तक EU प्रतिबंधों पर खुल कर समर्थन नहीं किया है।

रूस की प्रतिक्रिया भी सख्त हो सकती है

बहरहाल रूस की प्रतिक्रिया भी सख्त हो सकती है, और वह यूरोपीय देशों के खिलाफ काउंटर-सैंक्शन्स, गैस सप्लाई कटौती, या साइबर हमले जैसे जवाबी कदम उठा सकता है। उधर EU का यह कदम सिर्फ रूस तक सीमित नहीं है -यह एक वैश्विक भूचाल की शुरुआत हो सकता है, जहां संपत्तियां अब सिर्फ बैंक में रखी रकम नहीं, बल्कि राजनीतिक हथियार बन चुकी हैं।

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