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रूस-तालिबान सैन्य समझौते से हलचल, पाकिस्तान को सख्त चेतावनी; यूक्रेन युद्ध में भागीदारी की अटकलें खारिज

Russia Afghanistan relations: रूस और तालिबान के बीच हुए नए सैन्य समझौते ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। इस करार के बाद पाकिस्तान को सख्त चेतावनी मिली है, जबकि यूक्रेन युद्ध में तालिबान की भागीदारी की अटकलों को विशेषज्ञों ने खारिज किया है।
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Jun 01, 2026
Vladimir Putin
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन। (फाइल फोटो- IANS)

Russia-Taliban and military agreement: रूस और तालिबान के बीच हुए नए सैन्य समझौते ने दक्षिण एशिया की जियो-पॉलिटिक्स में हलचल तेज कर दी है। मास्को में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच के इतर रूसी सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु और तालिबान के रक्षा मंत्री मुल्ला याकूब (तालिबान संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे) ने इस सैन्य-तकनीकी सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस ऐतिहासिक करार के तुरंत बाद काबुल लौटे तालिबानी रक्षा मंत्री मुल्ला याकूब ने सीधे तौर पर पाकिस्तान को सख्त लहजे में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इस समझौते के लागू होने के बाद अब पाकिस्तान भविष्य में कभी भी अफगान सीमा के भीतर हवाई हमले करने की हिमाकत नहीं कर पाएगा।

मुल्ला याकूब ने स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान के पास बड़ी संख्या में रूसी हेलीकॉप्टर, विमान और हथियार हैं, जिन्हें मरम्मत और अपग्रेडेशन की सख्त जरूरत है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में वे अपनी हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए मजबूत "एयर डिफेंस सिस्टम" खरीदने पर भी विचार कर रहे हैं।

अफगानिस्तान से हुए इस समझौते को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में रूस की रणनीतिक वापसी के रूप में देखा जा रहा है। कई रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अफगानिस्तान में बढ़ते सैन्य सहयोग से चीन, ईरान और मध्य एशियाई देशों की भी नजरें मास्को–काबुल रिश्तों पर टिक गई हैं। वहीं पाकिस्तान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन कूटनीतिक हलकों में इसे सुरक्षा चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि रूस का उद्देश्य अफगानिस्तान में स्थिरता के साथ-साथ पश्चिमी प्रभाव को सीमित करना भी है।

अटकलेंः तालिबान लड़ाके यूक्रेन मोर्चे पर करेंगे जंग

इतना ही नहीं इस समझौते के बाद एशिया के कूटनीतिक हलकों में यह अटकलें तेज हो गईं कि क्या उत्तर कोरिया की तरह तालिबानी लड़ाके भी यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद के लिए उतरेंगे? हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों ने इस तरह की किसी भी संभावना को खारिज किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि तालिबान खुद अपने देश के भीतर आंतरिक सुरक्षा और आईएसआईएस जैसे संगठनों से जूझ रहा है, इसलिए वह रूस को अपनी सेना नहीं भेजेगा। यह समझौता फिलहाल केवल सैन्य साजो-सामान के रखरखाव तक सीमित है।

Updated on:
01 Jun 2026 04:42 am
Published on:
01 Jun 2026 04:42 am